ब्रह्मचर्य ही जीवन है

ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
DevanagariHindipublished199 पृष्ठ
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समर्पण-पत्र
एकोऽहं असहायोऽहं कृशोऽहं अपरिच्छुदः ।
स्वप्नेप्येव विधा चिन्ता मृगेन्द्रस्य न जायते ॥ १ ॥
परम सन्माननीय व श्रद्धास्पद योग, मल्ल तथा शास्त्रविद्या-
विशारद सिंहतुल्य अत्यन्त निर्भय, शूर व बलवान
परम तेजस्वी, ओजस्वी, यशस्वी, पूर्ण
सदाचारी, अतीव देशहितकारी, महत्-
परोपकारी कर्मवीर, निस्सीम नम्र,
निर्मल व शान्त नरकेशरी
आदर्श बालब्रह्मचारी,
प्रोफेसर माणिकरावजी
के परम पवित्र, कठोर, अखण्ड व दिव्य ब्रह्मचर्य
व्रत को वा तपस्या को यह वामन-कृति
सप्रेम व सावर समर्पित !
भवदीय नम्र वन्द्यु
शिवानन्द
ॐ !