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बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 284, कुल 315 में से

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पृष्ठ 284
  • १८१ -
    उससे लड़ने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था। अस्तु, नगर को खाली कर
    दिया गया। महमूद ने भी नगर को जहाँ तक लूटते बना लूटा। लेकिन तारा-
    गढ़ का किला लूट-खसोट से बच गया और महमूद अपने नियत स्थान गुजरात
    की ओर बढ़ गया। बीलभदेव के बाद वीसलदेव अजमेर का राजा हुआ जो
    बड़ा प्रतापी और वीर था।
    धार
    'धार' का पुराना नाम 'धारा नगरी' था। इस नगरी की उत्पत्ति के बारे
    में निश्चित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता। साधारणतः तलवार की धार
    से इस नगरी की उत्पत्ति का सम्बन्ध जोड़ा जाता है, क्योंकि इसकी स्थापना
    तलवार की जोर से ही हुई थी। मुसलमान इसे 'पीराधार' कई पुराने पीरों के
    मकरों के कारण और 'किलाधार' यहाँ के पुराने किले के कारण कहते हैं।
    यह नगर बहुत पुराना है और करीब पाँच सौ वर्षों तक यह मालवा के
    परमारों की राजधानी थी। परमारों ने अपनी पहली राजधानी उज्जैन में बन-
    वाई थी लेकिन वैर सिंह द्वितीय ने नवीं शती के अन्त में उज्जैन से अपनी
    राजधानी हटाकर 'धार' में बनवाई। इसके पश्चात् धार और परमार में
    इतना घनिष्ट सम्बन्ध हो गया कि यह किंवदन्ती प्रचलित हो गयी:—
    "Where the Parmara is, there is Dhar,
    And where Dhara is, there is Parmara
    Without Dhar the Parmara is nothing,
    So without the Parmara is That."
    मालवा के राजाओं की प्रशस्ति जो उदयपुर में प्राप्त हुई है और जो
    उदयपुर के प्रशस्ति के नाम से प्रख्यात है, उसके ११ वें छन्द में वीर सिंह के
    सम्बन्ध में लिखा हुआ है—"From him was born Vairisimha whom
    the people called by another name, the lord of vajrata by that
    king the famous Dhara was indicated, when he slew the crowd
    of his enemies by the sharp edge (Dhara) of his sword"
    उपर्युक्त दन्तकथाओं से निष्कर्ष यही निकलता है कि 'धार' नगर का
    नामकरण तलवार की 'धार' पर हुआ है। नामकरण की कथाओं के अतिरिक्त
    प्राचीन कवियों ने धार नगर की प्रशंसा में बहुत-कुछ कहा है। 'नवसहसांक
    चरित' का रचयिता पद्मगुप्त 'धार' के लिए कहता है :—
  1. Epigraphia Indica I, P. 222.