बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें- १५ -
अक्षर—देवनागरी । सुरक्षित स्थान—अभय जैन भण्डार
(बीकानेर)
पुष्पिका......नहीं है ।
आरम्भ—श्री वीतरागायनम । गवरि का नन्दन
त्रिभुवन सार । नाद भेद थारे उदर भण्डार । एक दंतौ
सबदले । मुसा की वाहण तिळक सिन्दूर । कर जोडी नरपति
भणै । जाखि केरि रोहिणी ज्यू संप्यौ सूर ।
अन्त—चोर परसा घरि आवियोनाइ । हीयडे हांथ
छक भरि याह । भयली सबली करे सुपणी । अति रति
भरि राजा छीयड ढीग । सही सहेली चमकौ हुधौ । झा को
गैरव को कचड बोओ भीनो छै पीक ॥ २५० ॥ हठ हठ हसे
थालिंगण देइ । पलिंग बेसे नै र्पान न लेइ । डुभी देह
डलमला । तोडे छै अंगुली मोडे छै बाह । पुरुष भरोसो
ना करू । चरत यारद्द......
[ २२ ] यह प्रति बीकानेर स्थित चतुर्भुज जी
के ग्रन्थ-संग्रह में (बस्ता न० ५) है । इसमें १७ पत्रे हैं ।
ग्रन्थ का रचना काल "सहस तिहुत्तरे दिया" हुआ है । यह
उन्नीसवीं शताब्दी की लिखी हुई है ।
[ २३ ] यह प्रति बीकानेर के दान सागर भण्डार
में (बस्ता नं० १४) है । इसमें पत्र संख्या २३ और छन्द
संख्या २८० है । प्रत्येक पृष्ठ में १३ पंक्ति और प्रति पंक्ति
में ३५ से ४० अक्षर हैं । यह प्रति भी १९ वीं शताब्दी की
लिखी हुई है । इसमें भी रचना काल 'सहस तिहुत्तरे' है ।
[ २४ ] यह प्रति जैसलमेर के जैन भद्र सूरि
ज्ञान भण्डार में है । इसकी पत्र संख्या ११ तथा पद्य
संख्या २०२ है । रचना काल सूचक पद्य नहीं है । प्रति
के प्रथम पत्र का लेखन भिन्न है, अवशेष पत्र १७ वीं के
लिखित प्रतीत होते हैं—
[ २५ ] यह प्रति जैसलमेर के बड़ा भण्डार—न०
५१९ में है । इसमें २८३ पद्य हैं । रचना काल 'सहस
तिहुत्तरे' दिया गया है ।