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सर्वकोश
भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary

महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished423 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 423 में से

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पृष्ठ 63

? Yes, 'नैवे'!

Line 29:
हावैर्भावैस्तव ग्रस्ता दवदग्धा लता यथा ॥ ५४ ॥

Line 30:
कृपय कृपय मह्यं कासि चार्वङ्गि भूयाः
Wait, does it say 'कृपय कृपय मह्यं'?
Look at line 30:
कृपय कृपय मह्यं कासि चार्वङ्गि भूयाः
(कृ-प-य कृ-प-य म-ह्यं का-सि चा-र्व-ङ्गि भू-याः)

Line 31:
किमपि सुखवती त्वं भूरिकल्याणिनी च।
(कि-म-पि सु-ख-व-ती त्वं भू-रि-क-ल्या-णि-नी च।)

Line 32:
इह हि तव पदाभ्यां शोणिताभ्या किलाभ्यां
Wait, 'शोणिताभ्या' or 'शोणिताभ्यां'?
Line 32: 'शोणिताभ्या' has no anusvara, but look at 'भ्या': there is an anusvara? Yes, faint dot, or 'शोणिताभ्या किलाभ्यां'. Let's check:
'शोणिताभ्या' or 'शोणिताभ्यां': let's write 'शोणिताभ्या' or 'शोणिताभ्यां'. There's a dot above 'भ्या