भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)
Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary
महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट
नामानुक्रमणी
भुशुण्डि रामायण का प्रकाशन तीन भागो मे हुआ है। प्रथम भाग मे पूर्वखंड द्वितीय
भाग मे दक्षिण खंड और तृतीय भाग मे पश्चिम तथा उत्तर खंड समाहित है। पाठकों की
सुविधा के लिए ग्रंथ के उपर्युक्त चारों खण्डो मे आये हुए व्यक्ति तथा स्थानवाचक शब्दों की
अनुक्रमणिका इस तृतीय तथा . अंतिम भाग के परिशिष्ट मे दी जा रही है। राम, सीता तथा
भाइयो के बहुउद्धृत नाम कलेवर वृद्धि के भय से छोड़ दिये गये हैं, प्रत्येक शब्द के सामने
संदर्भित भाग को सख्यानिर्देश के साथ ही उसकी स्थिति का पृष्ठांक दे दिया गया है।
अ अयोध्या I १५, ६०, १७९, ८६१, ३४०,
अग II ३६८ ४०७, ४५०, ४९४, ६१०, ८११,
अंगद II ५३९, ६१७, ६२०, ६४०, ६४८, ८६६, ९०४, ९४२, ९६६, ९७२, II
६६४, ७०७, ७२० १, १४, ५९, ८०, ९६, ११९, १८१,
अंगिरा I ४४, ४०९, १८३, ४८५, ६७६, १९७, २०७, ४१७, ७२०, ७२६ III
९६६ II ४०५ ४४, ७३, ९१, ११२, १३७, १४०,
अंबरीष I ५८१, ५८८ १४१, १५३, १६४, १६९, २३७,
अक्षयवट I ४९७ २७८, ३३३, ३६६, ३६८, ३७२,
अक्रूर I ५३८ ३७४, ३८०, ३९१
अक्रूरतीर्थ I ५३८ अरिसूदन III २११, २८२
अगस्त्य I ३८१, ४०९, ६१८, ६ ६ II अरिष्टनेमि II ३२६, ३२७
४०५, ६०५, III २३८, २४६ अरुंधती I ५२२, ७५१, III १८, ९०,
अग्नितीर्थ I ५१७ १०५, १४९, १५५
अजमीढ I ९६६ अर्जुन II ३७०, ३७३, ३७६
अदिति III १५६ अलका (पुरी) II ३६३, ३६४
अत्रि I ४०९, ४८३, ६१८, ६३३, ६७६, अवन्ती III ३८७
II ४०५. ४०८, ४११, ४२१, ४५५ अष्टावक्र III २५
अनसूया I ७५१ II ४००, ४११, ४१४ अशोककुज I ३२
III ९४ अशोकवन II ४३६ III १७०, १९८, २३९
अन्नकूट I ५४० अशोकवाटिका II ९२, ६०७, ७१९
अनिरुद्ध I ६१६ II १७८ III ४४, ३४६ अश्मवाह I ९६८
अत्रि I ४०९, ४८३, ६१८, ६३३, ६७६ आङ्गिरस I ५०४, ५२४, ९६६
अमरावती II ३९३ आत्रेय २९४, ९७, ९९, ३००, १, २, ३,
अम्बरीष II ५१२ III २१९ ४, ७, १०, १२, १४, १६, २५, २७,
३२, ३५