भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)
Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary
महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा
DevanagariHindipublished423 पृष्ठ
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- धीः (dhīḥ) ।
All correct.
त्रिपुण्ड्रं नैव कुर्वीत विशेषेण विवर्जयेत् ॥ १७ ॥
- त्रि (tri) पु (pu) ण्ड्रं (ṇḍraṁ)
- नै (nai) व (va)
- कु (ku) र्वी (rvī) त (ta)
- वि (vi) शे (śe) षे (ṣe) ण (ṇa)
- वि (vi) व (va) र्ज (rja) ये (ye) त् (t) ॥ १७ ॥
All correct.
अङ्गवस्त्रमपिस्नाने न तिर्यग्धारयेद्बुधः ।
- अ (a) ङ्ग (ṅga) व (va) स्त्र (stra) म (ma) पि (pi) स्ना (snā) ने (ne)
- न (na)
- ति (ti) र्य (rya) ग्धा (gdhā) र (ra) ये (ye) द्बु (dbu) धः (dhaḥ) ।
All correct.
यत्प्रमोदवने रम्ये रत्नाद्रितट भूमिषु ॥ १८ ॥
- य (ya) त्प्र (tpra) मो (mo) द (da) व (va) ने (ne)
- र (ra) म्ये (mye)
- र (