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सर्वकोश
भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary

महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished423 पृष्ठ

पृष्ठ 315, कुल 423 में से

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पृष्ठ 315
  • धीः (dhīḥ) ।
    All correct.

त्रिपुण्ड्रं नैव कुर्वीत विशेषेण विवर्जयेत् ॥ १७ ॥

  • त्रि (tri) पु (pu) ण्ड्रं (ṇḍraṁ)
  • नै (nai) व (va)
  • कु (ku) र्वी (rvī) त (ta)
  • वि (vi) शे (śe) षे (ṣe) ण (ṇa)
  • वि (vi) व (va) र्ज (rja) ये (ye) त् (t) ॥ १७ ॥
    All correct.

अङ्गवस्त्रमपिस्नाने न तिर्यग्धारयेद्बुधः ।

  • अ (a) ङ्ग (ṅga) व (va) स्त्र (stra) म (ma) पि (pi) स्ना (snā) ने (ne)
  • न (na)
  • ति (ti) र्य (rya) ग्धा (gdhā) र (ra) ये (ye) द्बु (dbu) धः (dhaḥ) ।
    All correct.

यत्प्रमोदवने रम्ये रत्नाद्रितट भूमिषु ॥ १८ ॥

  • य (ya) त्प्र (tpra) मो (mo) द (da) व (va) ने (ne)
  • र (ra) म्ये (mye)
  • र (