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भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary

महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished423 पृष्ठ

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घटीबन्धैकनिलया घटा घंटालविग्रहा ।
घनाघनस्वना घोरा घनसारसमाकृतिः ॥ ७० ॥
घोषा घोषवती घुष्या घोषेश्वरसुतप्रिया ।
घोरघनाशनकरी घर्मातिभयहारिणी ॥ ७१ ॥
घृणाकरी घृणिमती घृणिघ्राणेन्द्रियप्रिया ।
घ्राता घर्मांशुदुहिता घातिताघा घनाघना ॥ ७२ ॥
चान्द्री चन्द्रमती चन्द्रा चन्द्रिका चन्द्रिकाकृतिः ।
चन्द्रका चन्द्रकाकारा चन्दनालेपकारिणी ॥ ७३ ॥
चन्दनद्रवसंशीता चमत्कृतजगत्त्रया ।
चित्ता चित्तहरा चित्या चिन्तामणिसमाकृतिः ॥ ७४ ॥
चिन्ताहरा चिन्तनीया चराचरसुखप्रदा ।
चतुराश्रमसंसेव्या चतुराननसेविता ॥ ७५ ॥
चतुरा चतुराकारा चीर्णव्रतसुखप्रदा ।
चूर्णा चूर्णौषधसमा चपला चपलाकृतिः ॥ ७६ ॥
छलिनो छलहर्त्री च छलिताशेषमानवा ।
छद्मिनी छद्महरिणी छद्मसर्वविधायिनी ॥ ७७ ॥
छन्ना छन्नगतिश्छिन्ना छिदाकर्त्री छिदाकृतिः ।
छन्नाकारा छन्नजला छन्नपातकहारिणी ॥ ७८ ॥
जयघोषा जयाकारा जैत्रा जनमनोहरा ।
जन्मिनी जन्महरिणी जगत्त्रयविनोदिनी ॥ ७९ ॥
जगन्नाथप्रिया लक्ष्मीर्जम्बूद्वीपसुखप्रदा ।
जम्बालिनी जवगतिर्जपाकुसुमसुन्दरी ॥ ८० ॥
जम्बीररससंतुष्टा जाम्बूनदविभूषणा ।
जटाधरा च जटिला जम्भारिकरपूजिता ॥ ८१ ॥
जंगमा जितदैतेया जित्वरा जयवर्द्धिनी ।
जीवान्तरगतिर्जीव्या जीवाकर्षणतत्परा ॥ ८२ ॥
ज्यानिनादैकमुदिता जरानाशनतत्परा ।
जलाश्रया जलकरी जालिनी जालवर्तिनी ॥ ८३ ॥
जीमूतवर्षिणी जारा जारिणी जारवल्लभा ।
झञ्झारवा झणत्कारा झंझंरारवकारिणी ॥ ८४ ॥
झिल्लीनिनादमुदिता झल्लरीनादतोषिणी ।
झरी झर्झरिकारूपा झांकाररवकारिणी ॥ ८५ ॥