भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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'मेष लग्न'
[कुण्डली: १ 'मेष' लग्न, २, ३, ४, ५, ६, ७, ८, ९, १०, ११, १२]
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['मेष' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न भावों में स्थित
विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक्-पृथक् वर्णन]
'मेष' लग्न का फलादेश
'मेष' लग्न में जन्म लेने वाले जातक का शरीर इकहरा तथा कुछ लालिमा
लिए गौर वर्ण का होता है। वह स्वभाव से रजोगुणी, पित्त प्रकृति वाला, उग्र,
अहंकारी, चंचल, अत्यन्त चतुर, बुद्धिमान, धर्मात्मा, उदार, कुल-दीपक तथा अल्प-
संततिवान् होता है। स्त्रियों के प्रति उसका स्वार्थपूर्ण अल्प लगाव अथवा द्वेष
होता है।
इस लग्न वाले जातक को अपनी आयु के ६, ८, १५, २१, ३६, ४४, ५६
तथा ६३वें वर्ष में धन-हानि एवं शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है।
आयु के १६, २०, २८, ३४, ४१, ४८ तथा ५१वें वर्ष में उसे धन, वाहन, सौभाग्य
आदि का सुख प्राप्त होता है।
'मेष' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न
ग्रहों का स्थायी-फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डली संख्या ११६ से २२३ के
बीच देखना चाहिए।
गोचर-कुण्डली ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे
लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए।