भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र
(१६) चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की
की युति हो तो जातक विद्वान्, धनवान्, सज्जन,
निष्पाप, श्रेष्ठ स्वभाव वाला, बहुत पुत्रों वाला, मित्र-
वान् तथा सुखी जीवन बिताने वाला होता है।
चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शनि
(१७) चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु और शनि की
युति हो तो जातक मलिन, पराई सेवा करने वाला
तथा अन्न की याचना करने वाला होता है। उसे
रतौंधी रोग भी होता है।
चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र, शनि
(१८) चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र और शनि
की युति हो तो जातक कुरूप, मलिन, निर्धन, मूर्ख,
दुष्ट कर्म करने वाला, पर-निन्दक, कठोर-हृदय,
नपुंसक तथा अपने मित्रों से ही शत्रुता रखने वाला
होता है।
चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र, शनि
(१९) चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि की
युति हो तो जातक मलिन, पराई सेवा करने वाला,
दूसरों को कष्ट देने वाला, दुष्ट स्वभाव वाला, परन्तु
विद्वान् होता है। उसके अनेक मित्र तथा अनेक शत्रु
होते हैं।