भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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सूर्य, चन्द्र, मंगल, शुक्र
(३) सूर्य, चन्द्र, मंगल और शुक्र की युति हो
तो जातक विद्वान्, धनवान्, वाक्पटु, शास्त्रज्ञ, नीतिज्ञ,
स्त्री-पुत्र के सुख से सम्पन्न तथा वाणी से सम्बन्धित
कार्यों (वकालत आदि) से जीविका अर्जित करने
वाला होता है। परन्तु कुछ विद्वानों के मतानुसार ऐसा
व्यक्ति निर्लज्ज, परस्त्री-गामी, खोटे स्वभाव का, चोर
तथा धनहीन होता है।
सूर्य, चन्द्र, मंगल, शनि
(४) सूर्य, चन्द्र, मंगल और शनि की युति हो
तो जातक धनहीन, मूर्ख, दरिद्र, दुर्बल शरीर वाला,
बौना अथवा विषम कद का तथा भिक्षा द्वारा आजीविका
उपार्जित करने वाला होता है।
सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु
(५) सूर्य, चन्द्र, बुध और गुरु की युति
हो तो जातक तेजस्वी, नीतिज्ञ, शिल्पज्ञ, शोक-
रहित, अत्यन्त धनी, रोग-रहित, गौर-वर्ण तथा
सुन्दर नेत्रों वाला होता है।
सूर्य, चन्द्र, बुध, शुक्र
(६) सूर्य, चन्द्र, बुध और शुक्र की युति
हो तो जातक सुन्दर, कान्तिमान्, सुवक्ता, राज्य
द्वारा सम्मान-प्राप्त, छोटे कद वाला परन्तु मन में
व्याकुल रहने वाला होता है।