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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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मंगल : गुरु : शनि
(३०) मंगल, गुरु और शनि की युति हो तो
जातक दुराचारी, कृश-शरीर निर्धन, कुकर्मी, मित्रों द्वारा
निन्दित परन्तु राजा का कृपापात्र होता है।
मंगल : शुक्र : शनि,
(३१) मंगल, शुक्र और शनि की युति हो तो
जातक अच्छे स्वभाव वाला, परदेश में रहने वाला, सदैव
दुःख भोगने वाला तथा स्त्री के सुख से रहित होता है।
बुध : गुरु : शुक्र
(३२) बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक
सत्यवादी, परम यशस्वी, सदैव प्रसन्न रहने वाला, शत्रु-
हन्ता, सुन्दर तथा राजा द्वारा सम्मानित होता है।
बुध : गुरु : शनि
(३३) बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक
अत्यन्त धनी, शीलवान्, भाग्यवान्, धैर्यवान्, पण्डित,
सुखी, श्रेष्ठ वस्त्राभूषणों वाला तथा श्रेष्ठ स्त्री का पति
होता है।