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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 575, कुल 638 में से

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पृष्ठ 575

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'मीन' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश
मीन लग्न : पंचमभाव : राहु
पाँचवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित
'राहु' के प्रभाव से जातक को विद्याध्ययन में कठिनाइयाँ
आती हैं तथा सन्तान-पक्ष से भी उसे कष्ट का अनुभव
होता है।
ऐसे व्यक्ति की वाणी में रूखापन होता है तथा
मस्तिष्क में चिन्ताएँ घिरी रहती हैं। वह स्वार्थ-सिद्धि के
लिए उचित-अनुचित एवं सत्यासत्य का विचार भी नहीं
रखता।
'मीन' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश
मीन लग्न : षष्ठभाव : राहु
छठे भाव में शत्रु 'सूर्य' की राशि पर स्थित
'राहु' के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष पर भारी प्रभाव
रखता है तथा युक्ति-बल से शत्रुओं को परास्त करता
है। फिर भी, शत्रु-पक्ष उसे बार-बार परेशान करता
रहता है।
ननसाल-पक्ष से भी कुछ हानि होती है। ऐसा
व्यक्ति बड़ा हिम्मती, बहादुर, चतुर, धैर्यवान् तथा
सावधान होता है।
'मीन' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश
मीन लग्न : सप्तमभाव : राहु
सातवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित
'राहु' के प्रभाव से जातक की स्त्री-पक्ष से कुछ कष्ट
मिलता है तथा दैनिक व्यवसाय में भी कुछ कठिनाइयों
का अनुभव होता, परन्तु वह अपने युक्ति-बल एवं चातुर्य
से उन पर विजय प्राप्त करता रहता है। गृहस्थ-
जीवन में बार-बार आने वाले संकटों को भी दूर करता
रहता है।