भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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'मीन' लग्न की कुण्डली के 'द्वितीयभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश
मीनलग्न : द्वितीयभाव : गुरु दूसरे भाव में मित्र 'मंगल' की राशि पर स्थित
'गुरु' के प्रभाव से जातक के धन तथा कौटुम्बिक सुख की
पर्याप्त वृद्धि होती है, परन्तु शारीरिक स्वास्थ्य में कुछ
कमी आती है। पांचवीं मित्र-दृष्टि से षष्ठ भाव को देखने
से धन की शक्ति से शत्रु-पक्ष पर प्रभाव स्थापित होता है
तथा झगड़े के मामलों में धैर्य से काम लेकर सफलता
पाता है।
सातवीं शत्रु-दृष्टि से अष्टम भाव को देखने से
आयु तथा पुरातत्त्व की शक्ति में वृद्धि होती है। नवीं
दृष्टि से स्वराशि में दशम भाव को देखने से पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में
यथेष्ट सफलताएं मिलती हैं। ऐसा व्यक्ति धनी, सुखी तथा यशस्वी होता है।
'मीन' लग्न की कुण्डली के 'तृतीयभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश
मीनलग्न : तृतीयभाव : गुरु तीसरे भाव में शत्रु 'शुक्र' की राशि पर स्थित
'गुरु' के प्रभाव से जातक की भाई-बहिनों का सुख कुछ
मतभेद के साथ प्राप्त होता है तथा पराक्रम में वृद्धि
होती है। पिता से भी सामान्य मतभेद रहता है, परन्तु
राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में उन्नति होती है। पाँचवीं
मित्र-दृष्टि से सप्तमभाव को देखने से स्त्री-पक्ष से सुख
मिलता है तथा दैनिक व्यवसाय में सफलता मिलती है।
सातवीं मित्र-दृष्टि से नवमभाव को देखने से भाग्य
तथा धर्म की उन्नति होती है। नवीं नीच-दृष्टि से शत्रु
राशि में एकादश भाव को देखने से आमदनी के मार्ग में रुकावटें आती हैं।
'मीन' लग्न की कुण्डली के 'चतुर्थभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश
मीनलग्न : चतुर्थभाव : गुरु चौथे भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित
'गुरु' के प्रभाव से जातक को माता, भूमि एवं भवन का
श्रेष्ठ सुख मिलता है। शारीरिक सौन्दर्य, प्रभाव, यश तथा
घरेलू सुख की वृद्धि होती है। पाँचवीं शत्रु-दृष्टि से अष्टम
भाव को देखने से आयु एवं पुरातत्त्व की वृद्धि होती है।
सातवीं दृष्टि से स्वराशि में दशमभाव को देखने
से पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में सफलताएं मिलती
है। नवीं शत्रु-दृष्टि से द्वादश भाव को देखने से खर्च के
कारण परेशानी रहती है तथा बाहरी स्थानों से भी असन्तोषजनक सम्बन्ध रहते हैं।