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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 638 में से

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उच्चराशिस्य 'बुध'
उच्चराशिस्थ 'बुध'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'बुध' उच्च
(कन्या) राशि का हो, वह बड़ा विद्वान्, अत्यन्त बुद्धिमान,
लेखक, सम्पादक, सुखी, राजा अथवा राजमान्य, शत्रु-
नाशक तथा अपने वंश की वृद्धि करने वाला, निष्पाप,
धैर्यवान, परन्तु आलसी स्वभाव का होता है।
उच्चराशिस्थ 'बुध'
उच्चराशिस्थ 'गुरु'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'गुरु' उच्च
(कर्क) राशि का हो, वह सुन्दर, विद्वान्, चतुर,
सुशील, सद्गुणी, सुखी, राजप्रिय, मन्त्री, शासक, ऐश्वर्य-
शाली, सत्कर्म करने वाला, अनेक सेवकों से युक्त तथा
सदाचारी होता है।
उच्चराशिस्थ 'शुक्र'
उच्चराशिस्थ 'शुक्र'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'शुक्र' उच्च
(मीन) राशि का हो, वह सुखी, भाग्यवान, संगीतप्रिय,
कामी, विलासी, कला-प्रेमी, यन्त्र-मंत्र का ज्ञाता, ज्योतिषी,
कवि, संगीतज्ञ तथा यशस्वी होता है।
उच्चराशिस्य 'शनि'
उच्चराशिस्य 'शनि'
जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'शनि' उच्च
(तुला) राशि का हो, वह सुखी, यशस्वी, ऐश्वर्यशाली,
पृथ्वीपति, राजा, कृषक, सम्पन्न, मायावी, वाहनों से युक्त,
साहसी, दुष्टमति करने वाला, लोक-प्रसिद्ध सम्मानित
तथा धूर्त होता है।