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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 309, कुल 638 में से

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'कन्या' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश
कन्या लग्न : षष्ठभाव : गुरु छठे भाव में शत्रु 'शनि' की राशि पर स्थित
'गुरु' के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष में नम्रता से काम
निकालता है। माता, भूमि एवं भवन के सुख में भी
कमी रहती है। पाँचवीं मित्र-दृष्टि से दशमभाव को
देखने से पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में कुछ
सफलताओं, सुख तथा यश की प्राप्ति होती है।
सातवीं मित्र-दृष्टि से द्वादशभाव को देखने से
खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी संबंधों से लाभ
होता है। नवीं शत्रु-दृष्टि से द्वितीयभाव को देखने से कुटुम्ब का सामान्य सुख
मिलता है तथा धन-संचय के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है।
'कन्या' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश
कन्या लग्न : सप्तमभाव : गुरु सातवें भाव में स्वक्षेत्री 'गुरु' के प्रभाव से
जातक को स्त्री एवं व्यवसाय-पक्ष में पर्याप्त लाभ
मिलता है। माता, भूमि तथा मकान का यथेष्ट सुख
भी प्राप्त होता है। पाँचवीं उच्चदृष्टि से एकादशभाव
को देखने से आमदनी में बहुत वृद्धि होती है।
सातवीं मित्र-दृष्टि से प्रथमभाव को देखने से
शारीरिक-सुख, मान एवं सौन्दर्य की प्राप्ति होती है।
नवीं मित्र-दृष्टि से तृतीयभाव को देखने से भाई-बहिनों
के सुख एवं पराक्रम में वृद्धि होती है। ऐसा व्यक्ति
सुखी, धनी तथा यशस्वी होता है।
'कन्या' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश
कन्या लग्न : अष्टमभाव : गुरु आठवें भाव में मित्र 'मंगल' की राशि पर
स्थित 'गुरु' के प्रभाव से जातक को आयु तथा पुरातत्त्व
का लाभ होता है। परन्तु स्त्री तथा व्यवसाय के सुख
में कुछ कमी आती है।
पाँचवीं मित्र-दृष्टि से द्वादशभाव को देखने से
खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी सम्बन्धों से लाभ
होता है। सातवीं शत्रु-दृष्टि से द्वितीयभाव को देखने से
धन-वृद्धि के लिए विशेष परिश्रम करना पड़ता है तथा
कौटुम्बिक सुख में भी कमी आती है। नवीं दृष्टि से
स्वराशि में चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि तथा भवन का सुख कुछ परेशानियों
के साथ मिलता है।