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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 244, कुल 638 में से

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पृष्ठ 244

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'सिंह' लग्न
[कुण्डली चक्र: लग्न (५) 'सिंह' लग्न, द्वितीय भाव (६), तृतीय भाव (७), चतुर्थ भाव (८), पंचम भाव (९), षष्ठ भाव (१०), सप्तम भाव (११), अष्टम भाव (१२), नवम भाव (१), दशम भाव (२), एकादश भाव (३), द्वादश भाव (४)]
५५९
['सिंह' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न भावों में स्थित
विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक-पृथक वर्णन]
'सिंह' लग्न का फलादेश
'सिंह' लग्न में जन्म लेने वाले जातक के शरीर का रंग पाण्डुवर्ण होता है।
वह पित्त एवं वायु के विकार से पीड़ित रहता है। ऐसा व्यक्ति रजोगुणी, वीर,
साहसी, अत्यन्त पराक्रमी, अहंकारी, क्रोधी, उग्रस्वभाव, अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण
ढीठ, भोगी, तीक्ष्णबुद्धि, घुड़सवारी से प्रेम रखने वाला तथा मांस एवं रसीली
वस्तुओं का भोजन करने वाला होता है।
इसके हाथ बड़े होते हैं तथा छाती चौड़ी होती है। यह उदार तथा साधु-
सन्त-सेवी भी होता है।
इस लग्न वाला जातक अपनी आरंभिक अवस्था में सुखी, मध्यावस्था में
दुःखी तथा अन्तिमावस्था में पूर्ण सुखी रहता है। इसका भाग्योदय २१ अथवा २८
वर्ष की आयु में होता है। सिंह लग्न वाला व्यक्ति जहाँ प्रबल पराक्रमी होता है,