भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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ग्रह : उनका स्वभाव और प्रभाव
आकाशमण्डलस्थ असंख्य ज्योतिष्पिण्डों में से जो पिण्ड पृथ्वी स्थित सभी जड़-
चेतन पदार्थों को अपने प्रभाव से प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, उनकी गणना
ग्रहों में की जाती है। प्राचीन भारतीय-ज्योतिष में ऐसे ग्रहों की कुल संख्या ७
बताई गई है। वे हैं—१. सूर्य, २. चन्द्र, ३. मंगल, ४. बुध, ५. बृहस्पति, ६. शुक्र
और ७. शनि।
परवर्ती ज्योतिषियों ने अपने अनुसन्धानों के बल पर यह सिद्ध किया कि
भूमण्डल की दोनों ओर पड़ने वाली छाया भी ग्रहों जैसी ही प्रभावशालिनी है, अतः
उन्होंने 'राहु', 'केतु' नामक दो अन्य छायाग्रहों की कल्पना करके ग्रहों की कुल संख्या
९ कर दी।
आधुनिक काल के पाश्चात्य ज्योतिषियों ने आकाशमण्डल में ३ अन्य ग्रहों
की भी खोज की है। वे हैं—(१) हर्षल, (२) नेपच्यून और (३) प्लूटो। ये सभी
ग्रह पूर्वोक्त ७ ग्रहों से भी अत्यधिक ऊँचाई पर स्थित हैं। इस प्रकार कुल ग्रहों की
संख्या १२ हो जाती है। परन्तु भारतीय-ज्योतिष में अभी तक पाश्चात्य ज्योतिषों
द्वारा नवीन-आविष्कृत तीन ग्रहों को स्थान नहीं दिया गया है। अतः उसमें छायाग्रह
राहु-केतु सहित केवल ९ ग्रहों का ही उल्लेख मिलता है।
चन्द्र, बृहस्पति तथा शुक्र इन तीन ग्रहों को शुभ ग्रह माना जाता है। बुध
को नपुंसक ग्रह माना गया है, यह जिस ग्रह के साथ बैठता है, उस जैसा ही प्रभाव
देता है। सूर्य, मंगल तथा शनि क्रूर ग्रह कहे गये हैं। राहु-केतु की गणना भी क्रूर
ग्रहों में की जाती है। परन्तु कुछ विद्वानों के मतानुसार 'केतु' को भी शुभ ग्रह माना
जाता है।
उक्त ९ ग्रहों में कौनसा ग्रह किस स्वभाव, बल तथा प्रभाव वाला है तथा
उसके द्वारा किन विषयों का विशेष रूप से विचार करना चाहिए, इसे निम्नानुसार
समझ लें—
(१) सूर्य—यह ग्रह 'पाप' संज्ञक, पूर्व दिशा का स्वामी, पुरुष जाति, रक्त-
वर्ण एवं पित्त प्रकृति का है। स्नायु, मेरुदण्ड, नेत्र, हृदय आदि अवयवों पर इसका
विशेष प्रभाव होता है। इसके द्वारा आत्मा आरोग्य, स्वभाव, पिता, राज्य, देवालय,
शोक, अपमान, कलह तथा रोग—अतिसार, क्षय, मंदाग्नि, मानसिक रोग, नेत्र
विकार आदि के सम्बन्ध में विचार करना चाहिए।
यह लग्न से सप्तम स्थान में बली एवं मकर से ६ राशियों तक चेष्टा-बली
होता है।