सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 177, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 177

१८४
'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'द्वितीयभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश
मिथुन लग्न : द्वितीयभाव : बुध
दूसरे भाव में शत्रु चन्द्रमा की राशि में
स्थित बुध के प्रभाव से जातक को धन तथा
कुटुम्ब का सुख तो प्राप्त होता है, परन्तु शारीरिक
एवं माता के सुख में कमी रहती है। भूमि, भवन
तथा सम्पत्ति का सुख अच्छा मिलता है।
सातवीं मित्र-दृष्टि से अष्टमभाव को देखने
के कारण जातक की आयु में वृद्धि होती है तथा
पुरातत्त्व का भी लाभ होता है।
३७१
'मिथुन' लग्न की कुण्डली के 'तृतीयभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश
मिथुन लग्न : तृतीयभाव : बुध
तीसरे भाव में मित्र सूर्य की राशि पर
स्थित बुध के प्रभाव से जातक को भाई-बहिनों
का सुख मिलता है तथा पराक्रम में वृद्धि होती
है। माता, भूमि एवं भवन का भी अच्छा सुख
रहता है। ऐसा व्यक्ति बड़ा हिम्मती होता है।
सातवीं मित्रदृष्टि से नवमभाव को देखने
[