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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 170, कुल 638 में से

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‘मिथुन’ लग्न की कुण्डली के ‘पंचमभाव’ स्थित ‘चन्द्रमा’ का फलादेश
मिथुन लग्न : पंचमभाव : चन्द्र
पाँचवें भाव में सामान्य मित्र शुक्र की राशि पर
स्थित चन्द्रमा के प्रभाव से जातक को सन्तान-पक्ष में
कुछ रुकावटें आती हैं, परन्तु विद्या-बुद्धि के क्षेत्र में पर्याप्त
सफलता मिलती है।
सातवीं मित्रदृष्टि से एकादशभाव को देखने के
कारण आमदनी अच्छी रहती है। ऐसा जातक सुखी,
धनी, चतुर तथा प्रतिष्ठित होता है।
‘मिथुन’ लग्न को कुण्डली के ‘षष्ठभाव’ स्थित ‘चन्द्रमा’ का फलादेश
मिथुन लग्न : षष्ठभाव : चन्द्र
छठे भाव में मित्र मंगल की राशि पर स्थित
चन्द्रमा के प्रभाव से जातक कठिन परिश्रम द्वारा
धनोपार्जन करता है तथा शत्रु-पक्ष द्वारा भी चोट खा
सकता है।
सातवीं सामान्य मित्रदृष्टि से द्वादशभाव को
देखने के कारण खर्च अधिक रहता है, परन्तु बाहरी
स्थानों के सम्पर्क से लाभ होता है।
ऐसा व्यक्ति धन कमाने के विषय में अपयशी
होता है।
‘मिथुन’ लग्न को कुण्डली के ‘सप्तमभाव’ स्थित ‘चन्द्रमा’ का फलादेश
मिथुन लग्न : सप्तमभाव : चन्द्र
सातवें भाव में मित्र गुरु की राशि पर स्थित
चन्द्रमा के प्रभाव से जातक को स्त्री-पक्ष में कुछ रुकावटों
के साथ सफलता मिलती है तथा विवाह के बाद
भाग्योन्नति होती है। व्यवसाय एवं भोगादि का पर्याप्त
सुख भी तभी मिलता है।
सातवीं मित्रदृष्टि से प्रथमभाव को देखने के
कारण जातक का शरीर सुन्दर होता है और प्रतिष्ठा भी
प्राप्त करता है।