भोजनकुतूहल: प्रथम भाग (रघुनाथ नवहस्त - आहार-रसायन, पाकशाला-व्यवस्था व विरुद्धाहार)
Bhojanakutuhala of Raghunatha Navahasta
रघुनाथ नवहस्त (सम्पादक: सूरनाड कुंजन पिल्लै) द्वारा
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श्लोकाः पृष्ठम् | श्लोकाः पृष्ठम्
रसवीर्ययोः 141 | ” ”
” 175 | ” ”
रसवीर्यविपाकेषु 116 | लता 6
” 67 | रुचिपुष्टिप्रदः 11
रसस्तदुद्भवः 158 | ” 3
” 104 | ” 22
रसाशने कार्यं 232 | रूक्षं कासिल्वलं 17
” 64 | रूक्षं चणकवाट्यं 7
रक्ता सर्वरोगघ्नी 141 | रूक्षं च दीपनं 6
रसे कटु 227 | रूक्षं घृतक्षमोद्भूतं 10
रसेन भोज्यः 61 | रूक्षं तित्तिरिकं 17
रसेनाम्वरस्य 218 | रूक्षं तु कफदं 17
रसे फाडे च 102 | रूक्षं दीपनहृत् 18
” 107 | रूक्षं पित्त 4
रक्षसु मधुरः 211 | रूक्षं कफं 10
रक्षोघ्नो ज्वरहरो 27 | रूक्षं श्लेष्मानिलं 10
रक्षोबोजमयः 60 | रूक्षं संग्राहि 10
रक्षोघ्नश्च .. ” | रूक्षं सुगन्ध्यं 10
राजबदरः 94 | रूक्षं सुगन्धि 7
राजमाषो गुरुः 11 | रूक्षं स्वादु 8
राजमाषो नीलमाषो ” | ” 10
राजयक्ष्मणि 151 |
राजवारुणिका 67 | रूपस्तुल्यो मुनिः 10
राजसर्षपकः 18 | रूप्याः पाक्यं 9
राजादनं मातुलुङ्गं 11 | रोचनाग्निप्रदीपनो 11
राजादनं तु त्रिदोषघ्नं 3 | रोचनानि तानि 5
राजानाः कोमलाः 08 | ” 6
राजिकादियुते 52 | रुजा वातहरा 4
राजीकूर्चेन 28 | रुजा विष्टम्भ 4
रात्रौ क्षीरं 31 | रौतः कार्यं 17
रात्रौ च पर्णबहुळं 29 | र्छा च पित्त 12
रात्री सौम्यगुणत्वात् 31 | र्श हृद्यं 221
रीतिस्त्रात्रस्थितं 95 | र्श विषूच्यदोषघ्नं 91
रोचनहृद्द्दीपनं 66 | लाक्षातीतो गुरुः