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सर्वकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 296, कुल 654 में से

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पृष्ठ 296
  • प्रतिसर्गपर्व, प्रथम खण्ड * २८५
    बनाया। वे भगवान् विष्णु तथा भगवान् शिवकी | कमलांशु हुए। उनके पुत्र पारावत हुए, उन्हें ज्यामघ
    आराधनामें तत्पर रहे। भगवती महामायाकी प्रसन्नताके | नामका पुत्र उत्पन्न हुआ। ज्यामघके पुत्र विदर्भ
    लिये उन्होंने सौ यज्ञ किये और अट्ठारह हजार | हुए। उनको क्रथ नामका पुत्र उत्पन्न हुआ। उनके
    वर्षोंतक राज्यकर वे पुनः स्वर्गलोक चले गये। | पुत्र कुन्तिभोज हुए। कुन्तिभोजने पातालमें निवास
    चन्द्रमाके पुत्र बुध हुए। बुधका विवाह इलाके साथ | करनेवाली पुरु दैत्यकी पुत्रीसे विवाह किया, जिससे
    विधिपूर्वक हुआ, जिससे पुरूरवाकी उत्पत्ति हुई। | वृषपर्वण नामका पुत्र हुआ। उनके पुत्र मायाविद्य
    राजा पुरूरवाने चौदह हजार वर्षोंतक पृथ्वीपर शासन | हुए, जो देवीके भक्त थे। उन्होंने प्रयागके प्रतिष्ठानपुर
    किया। उनको भगवान् विष्णुकी आराधनामें तत्पर | (झूँसी)-में दस हजार वर्षोंतक राज्य किया फिर
    रहनेवाला आयु नामका एक धर्मात्मा पुत्र उत्पन्न | वे स्वर्ग सिधार गये। मायाविद्यके पुत्र जनमेजय
    हुआ। महाराज आयु छत्तीस हजार वर्षोंतक राज्यकर | (प्रथम) हुए और उनका पुत्र प्रचिन्वान् हुआ।
    गन्धर्वलोकको प्राप्त करके पुनः स्वर्गमें देवताके | प्रचिन्वान्के पुत्र प्रवीर हुए। उनके पुत्र नभस्य हुए,
    समान आनन्द भोग रहे हैं। आयुके पुत्र हुए नहुष, | नभस्यके पुत्र भवद और उनके सुद्युम्न नामका पुत्र
    जिन्होंने अपने पिताके समान ही धर्मपूर्वक पृथ्वीपर | हुआ। सुद्युम्नके पुत्र, बाहुगर, उनके पुत्र संयाति
    राज्य किया। तदनन्तर उन्होंने इन्द्रत्वको प्राप्तकर | और संयातिके पुत्र धनयाति हुए। धनयातिके पुत्र
    तीनों लोकोंको अपने अधीन कर लिया। फिर | ऐन्द्राश्व, उनके पुत्र रन्तीनर और रन्तीनरके पुत्र
    बादमें महर्षि दुर्वासाके शापसे¹ राजा नहुष अजगर | सुतपा हुए। सुतपाके पुत्र संवरण हुए, जिन्होंने
    हो गये। इनके पुत्र ययाति हुए। ययातिके पाँच पुत्र | हिमालय पर्वतपर तपस्या करनेकी इच्छा की और
    हुए, जिनमेंसे तीन पुत्र म्लेच्छ देशोंके शासक हो | सौ वर्षोंतक तपस्या करनेपर भगवान् सूर्यने अपनी
    गये²। शेष दो पुत्रोंने आर्यत्वको प्राप्त किया। उनमें | तपती नामकी कन्यासे इनका विवाह कर दिया।
    यदु ज्येष्ठ थे और पुरु कनिष्ठ। उन्होंने तपोबल तथा | संतुष्ट होकर राजा संवरण सूर्यलोक चले गये।
    भगवान् विष्णुके प्रसादसे एक लाख वर्षोंतक राज्य | तदनन्तर कालके प्रभावसे त्रेतायुगका अन्त समय
    किया, अनन्तर वे वैकुण्ठ चले गये। | उपस्थित हो गया, जिससे चारों समुद्र उमड़ आये
    यदुके पुत्र क्रोष्टुने साठ हजार वर्षोंतक राज्य | और प्रलयका दृश्य उपस्थित हो गया। दो वर्षोंतक
    किया। क्रोष्टुके पुत्र वृजिनघ्न हुए, उन्होंने बीस | पृथ्वी पर्वतोंसहित समुद्रमें विलीन रही। झंझावातोंके
    हजार वर्षोंतक पृथ्वीपर शासन किया। उनको | प्रभावसे समुद्र सूख गया, फिर महर्षि अगस्त्यके
    स्वाहार्चन नामका एक पुत्र हुआ। उनके पुत्र चित्ररथ | तेजसे भूमि स्थलीभूत होकर दीखने लगी और
    हुए और उनके अरविन्द हुए। अरविन्दको | पाँच वर्षके अंदर पृथ्वी वृक्ष, दूर्वा आदिसे सम्पन्न
    विष्णुभक्तिपरायण श्रवस् नामका पुत्र उत्पन्न हुआ। | हो गयी। भगवान् सूर्यदेवकी आज्ञासे महाराज संवरण
    उनके तामस हुए, तामसके उशन नामका पुत्र हुआ। | महारानी तपती, महर्षि वसिष्ठ और तीनों वर्णोंके
    उनके पुत्र शीतांशुक हुए तथा शीतांशुकके पुत्र | लोगोंके साथ पुनः पृथ्वीपर आ गये। (अध्याय २)
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    १-महाभारत आदिमें ये अगस्त्य ऋषिके शापसे अजगर हुए थे।
    २-इनका पूरा विवरण मत्स्यपुराणके प्रारम्भिक अध्यायोंमें प्राप्त होता है।
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