भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 291, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ें२८० * संक्षिप्त भविष्यपुराण *
धूमकेतुका दिखलायी पड़ना, जमीनका खिसकना | राहुजन्य उत्पात हैं। इनकी शान्तिके लिये शनिवारके
मालूम होना—ऐसी स्थितिमें राजा पीड़ित होता | दिन शनिके निमित्त दस हजार आहुतियाँ देनी
है, राज्यमें अकाल पड़ता है तथा अनेक प्रकारके | चाहिये। अर्क-पुष्पसे शनिकी पूजा करे तथा
अनिष्ट होते हैं। इनकी शान्तिके लिये स्वर्णछत्रयुक्त | चरुसे सौ बार आहुति दे। वाम और दक्षिणके
सात घोड़ोंसे युक्त सूर्यमण्डप बनाकर ब्राह्मणको | क्रमसे यदि बाहु, पैर तथा आँखमें स्पन्दन हो तो
दान करे। बिल्वपत्र भी दे, ऐन्द्र मन्त्रसे हवन | इससे मृत्युका भय होता है। यह सोमग्रहजनित
करे। यदि अकस्मात् शाल, ताल, अक्ष, खदिर, | दुर्निमित्त है। पुस्तक, यज्ञोपवीत, चरु तथा इन्द्र-
कमल आदि घरके अंदर ही उत्पन्न हों तो ये | ध्वजमें आग लग जाय तो यह सूर्यजन्य दुर्निमित्त
सभी केतुग्रहजन्य दोष हैं। इनकी शान्तिके लिये | है। इसकी शान्तिके लिये सूर्यके निमित्त त्रिमधुयुक्त
'त्र्यम्बकं ० ' (यजु० ३।६०) इस मन्त्रसे दही, | कनेरके पुष्पोंसे आहुतियाँ देनी चाहिये। जिन
मधु, घृतसे दस हजार आहुतियाँ दे तथा चरु भी | ग्रहोंका दुर्निमित्त दिखलायी दे, उसकी शान्तिके
प्रदान करे। नीली सवत्सा पयस्विनी गाय, वस्त्र, | लिये ग्रहों तथा उसके अधिदेवता और प्रत्यधिदेवताके
केतुकी प्रतिमा आदि ब्राह्मणको दान करे। | निमित्त भी विधिपूर्वक पूजन-हवन-स्तवन, दान
दक्षिण दिशामें अपनी छाया अपने पैरके | आदि करना चाहिये। विधिके अनुसार क्रिया न
एकदम समीप आ जाय और छायामें दो या पाँच | करनेसे दोष होता है। अतः ये सभी शान्त्यादि-
सिर दिखलायी दें अथवा छिन्न-भिन्न रूपमें सिर | कर्म शास्त्रोक्त विधानके अनुसार ही करने चाहिये।
दिखलायी दे तो देखनेवालेकी सप्ताहके भीतर ही | इससे शान्ति प्राप्त होती है और सर्वविध कल्याण-
मृत्युकी आशंका होती है। कौआ, बिल्ली, तोता | मङ्गल होता है।
तथा कपोतका मैथुन दिखलायी दे तो ये दुर्निमित्त | (अध्याय २०)
॥ मध्यमपर्व, तृतीय भाग सम्पूर्ण ॥
॥ भविष्यपुराणान्तर्गत मध्यमपर्व सम्पूर्ण ॥
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