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सर्वकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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पृष्ठ 923

८७२ भावप्रकाशनिघण्टुः
अथ कूपजादिमत्स्याः । तेषां मांसगुणानाह
कौपमत्स्याः शुक्रमूत्रकृच्छ्रश्लेष्मविवर्द्धनाः । सरोजा मधुराः स्निग्धा बल्या वातविनाशनाः ।।
नादेया बृंहणा मत्स्या गुरोऽनिलनाशनाः । रक्तपित्तकरा वृष्याः स्निग्धाष्णाः स्वल्पवर्चसः ।।
चौब्याः पित्तकराः स्निग्धा मधुरा लघवो हिमाः । तडागा गुरवो वृष्याः शीतला मलमूत्रदाः ।।
ताडागवन्निर्झरजा बलायुर्मतिदृक्कराः ।।१२८।।
कुएँ में रहने वाली मछलियों का मांस-शुक्र, मूत्र, कुष्ठ तथा कफ को बढ़ानेवाला होता है ।
सरोवर में रहने वाली मछलियों का मांस-मधुर रसयुक्त, स्निग्ध, बलकारक तथा वायु को नष्ट करने वाला
होता है ।
नदियों में रहने वाली मछलियों का मांस-बृंहण (रस-रक्तादिवर्धक), गुरु, वातनाशक, रक्तपित्तकारक,
वीर्यवर्धक, स्निग्ध, उष्ण एवं स्वल्प मात्रा में मल को निकालने वाला होता है ।
चोंढा या हौज में रहने वाली मछलियों का मांस-पित्तकारक, स्निग्ध, मधुर रसयुक्त, लघु तथा शीतल होता
है ।
तालाब की मछलियों का मांस-गुरु, वीर्यवर्धक, शीतल, मल तथा मूत्र को निकालने वाला होता है ।
झरनों में रहनेवाली मछलियों का मांस-गुणों में तालाबों में रहनेवाली मछलियों के समान ही होता है किन्तु
विशेष करके बल, आयु, बुद्धि तथा दृष्टि शक्ति को बढ़ानेवाला होता है ।।१२४]
अथर्तुविशेषे मत्स्यविशेषाणां मांसगुणानाह
हेमन्ते कूपजा मत्स्याः शिशिरे सारसा हिताः । वसन्ते ते तु नादेया ग्रीष्मे चौब्यसमुद्भवाः ।।
तडागजाता वर्षासु तास्वपथ्या नदीभवाः । नैर्झरा शरदि श्रेष्ठा विशेषोऽयमुदाहृतः ।।१२९।।
विशेष-विशेष ऋतुओं में विशेष-विशेष मछलियों के मांस का गुण-हेमन्त ऋतु (अगहन-पूसमास) में-
कूप में रहने वाली मछलियों का मांस; शिशिर ऋतु (माघ-फागुनमास) में-सरोवर में रहनेवाली मछलियों का मांस;
वसन्त ऋतु (चैत-वैशाख मास) में-नदी में रहने वाली मछलियों का मांस और ग्रीष्म ऋतु (जेठ-आषाढ़ मास) में-
चोंड़ा या हौज की मछलियों का मांस हितकर होता है । वर्षा ऋतु (सावन-भादो मास) में-तालाब की मछलियों का
मांस हितकर और नदी की मछलियों का मांस अपथ्य (अहितकर) होता है । शरद ऋतु (क्वार-कार्तिक मास) में-झरनों
की मछलियों का मांस-उत्तम होता है । इस प्रकार से मछलियों के मांस के सम्बन्ध में जो विशेषतायें थीं उनका वर्णन
कर दिया गया है । [१२६]
इति श्रीमिश्रलटकनतनय श्रीमिश्रभावविरचिते भावप्रकाशे वर्गप्रकरणे
मांसवर्गः समाप्तः ।