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सर्वकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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, शर्करा एवं उष्ण जल के साथ १० रत्ती सोरा देने से पसीना होकर ज्वर कम हो जाता है। -> "मद्य"
(६) वातरक्त (गाउट) एवं मदात्ययजन्य शिरःशूल के निवारण के लिये सोरा १० रत्ती एवं पोर्टेशियम् बाइकार्बोनेट
१५ रत्ती एक बोतल सोडावाटर के साथ पिलाने से आवेग रुक जाता है। आमवात में अर्कमूल के चूर्ण के साथ या
मांड के साथ इसको दिया जाता है।
(७) उरस्तोय (प्लूरिसी), सद्रव हृदयावरणशोथ (पेरीकार्डाइटिस्) एवं जलोदर आदि में पुनर्नवा, काली कुटकी,
सोंठ आदि के क्वाथ के साथ इसका प्रयोग करते हैं।
(८) ५ साल से बड़े बच्चों की खाँसी में सोरा ५, हीराकासीस ४, नौसादर ४ एवं गन्धक ४ भाग इनका चूर्ण
१/२ रत्ती की मात्रा में देते हैं।
(९) शिरःशूल, शोथ, आमवातज सन्धिपीड़ा, मोच एवं चोट आदि पर नवसादर एवं सोरा जल में घोल कर उसमें
कपड़ा भिगो कर उसकी पट्टी रखी जाती है।