भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३० भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे
दुग्धकूपिका बनाने की विधि तथा गुण ८८८ | नादेयजल के लक्षण तथा गुण ८९९
जलेबी बनाने की विधि तथा गुण ८८८ | नदीजल के गुण-भेद ८९९
श्रीखण्ड बनाने की विधि तथा गुण ८८९ | औद्भिदजल के लक्षण तथा गुण ८९९
सरबत बनाने की विधि तथा गुण ८८९ | नैर्झरजल के लक्षण तथा गुण ९००
आम का पन्ना बनाने की विधि तथा गुण ८८९ | सारसजल के लक्षण तथा गुण ९००
इमली का पन्ना बनाने की विधि तथा गुण ८९० | तडागजल के लक्षण तथा गुण ९००
नीबू का पानक बनाने की विधि तथा गुण ८९० | वाप्यजल के लक्षण तथा गुण ९००
धनिये का पानक बनाने की विधि तथा गुण ८९० | कौपजल के लक्षण तथा गुण ९००
काञ्जी बनाने की विधि तथा गुण ८९० | चौञ्च्यजल के लक्षण तथा गुण ९०१
जाली बनाने की विधि तथा गुण ८९१ | पाल्वलजल के लक्षण तथा गुण ९०१
छाछ की विधि तथा गुण ८९१ | विकिरजल के लक्षण तथा गुण ९०१
भोजन के अन्त में दूध पीने के गुण ८९१ | कैदारजल के लक्षण तथा गुण ९०२
सत्तू बनाने की विधि तथा गुण ८९१ | वर्षाजल के लक्षण तथा गुण ९०२
यवमिश्रित चने के सत्तू बनाने की विधि तथा गुण ८९२ | हेमन्तादि जल के लक्षण तथा गुण ९०२
चावल के सत्तू के गुण ८९२ | अंशूदकजल के लक्षण तथा गुण ९०२
सत्तू के विषय में सामान्य परिभाषायें ८९२ | मासभेद से जल के लक्षण तथा गुण ९०३
बहुरी बनाने की विधि तथा गुण ८९२ | जलग्रहण करने का समय ९०३
खील बनाने की विधि तथा गुण ८९३ | जल पीने की विधि ९०३
चिउड़ा बनाने की विधि तथा गुण ८९३ | शीतल जलपान के गुण और निषेध ९०३
होरहा बनाने की विधि तथा गुण ८९३ | थोड़ा जल पीने का निर्देश ९०४
ऊंबी बनाने की विधि तथा गुण ८९३ | जलपान की आवश्यकता ९०४
घुघुरी बनाने की विधि तथा गुण ८९४ | गुणकारी जल के लक्षण ९०४
तिलकुट बनाने की विधि तथा गुण ८९४ | दूषित जल की शुद्धि ९०५
पिण्याक बनाने की विधि तथा गुण ८९४ | पीये हुए जल के पचने का समय ९०५
चावल के गुण बनाने की विधि तथा गुण ८९४ | दुग्धवर्गः
वारिवर्गः | दूध के नाम और गुण ९०६
जल के नाम, गुण तथा भेद ८९५ | दूध पीने योग्य मनुष्य ९०६
धाराजल के लक्षण गुण तथा भेद ८९५ | गोदुग्ध के गुण ९०६
गंगाजल के लक्षण तथा गुण ८९६ | काली गायों के दुग्ध गुण ९०६
शरद् ऋतु में जल का निर्विष होना ८९६ | नई व्याई तथा बकेन गायों के दुग्ध-गुण ९०७
वर्षारृतु में जल का सविष होना ८९७ | मृतवत्सा गायों के दुग्ध-गुण ९०७
अनार्तवसंज्ञक धारा-जल के गुण ८९७ | देशविशेष से गाय का गोदुग्ध के गुण ९०७
करका जल के लक्षण तथा गुण ८९७ | आहारादि विशेष से गोदुग्ध के गुण ९०७
तौषार जल के लक्षण तथा गुण ८९७ | भैंस के दूध के गुण ९०७
हैमजल के लक्षण तथा गुण ८९७ | विभिन्न दुग्ध एवं मट्ठा आदि का पोषणात्मक ९०८
भौमजल के लक्षण तथा गुण ८९८ | संगठन
जांगलजल के लक्षण तथा गुण ८९८ | बकरी के दूध के गुण ९०९