भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९५८ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे
४ पलों का एक कुडव होता है। इसके बाद प्रस्थादि का मान पूर्वोक्त रीति के समान ही माना गया है। वस्तुतः
ओषधियों की मात्रा का कोई मर्यादा निश्चित नहीं है। अतः बुद्धिमान् वैद्य को चाहिये कि—काल (शीतादि ऋतु और प्रातः,
सायं आदि), अग्नि (मन्द, दीप्त आदि), अवस्था (बाल्यादि), बल, प्रकृति (वातादि), दोष (वातादि) और देश (जाङ्गलादि)
को देखकर तदनुसार मात्रा की कल्पना करें। उचित मात्रा की अपेक्षा हीन मात्रा की ओषधि बढ़े हुये रोग को उसी प्रकार
शान्त नहीं कर सकती है जैसे कि—थोड़ा जल बड़े अग्निराशि को नहीं शान्त कर सकता। यदि ओषधि की अधिक मात्रा
दी जाय तो भी हानिकारक ही होती है जैसे कि—धान में भी अधिक जल हानिकारक होता है। इससे बहुत समझ बूझ
कर ओषधियों की मात्रा देनी चाहिये ॥२३-२८॥
मागध मान तथा कालिङ्ग मान की आधुनिक मान से तुलना—मागध मान का १ कर्ष १ तोले (१२ माशे) के
बराबर तथा कालिङ्ग मान का १ कर्ष (१० माशे) एक रुपये भर का होता है। इतना ध्यान अवश्य देना चाहिये।
मागध मान आधुनिक मान
६ रत्ती का १ माशा = ६ रत्ती
४ माशे का १ शाण (टङ्क) = ३ माशा
२ शाण का १ कोल = ६ माशा (आधा तोला)
२ कोल का १ कर्ष = १२ माशा (१ तोला)
२ कर्ष का १ अर्धपल (शुक्ति) = २ तोले
२ शुक्ति का १ पल = ४ तोले
२ पल की १ प्रसृति = ८ तोले
२ प्रसृति की १ अञ्जलि (कुडव) = १६ तोले
२ कुडव की १ मानिका (शराव) = ३२ तोले
२ शराव का १ प्रस्थ = ६४ तोले
४ प्रस्थ का १ आढक = २५६ तोले
४ आढक का १ द्रोण = १०२४ तोले
२ द्रोण का १ शूर्प = २०४८ तोले
२ शूर्प की १ द्रोणी = ४०९६ तोले
४ द्रोणी की १ खारी = १६३८४ तोले
२००० पल का १ भार = ८००० तोले
१००० पल की १ तुला = ४०० तोले
कालिङ्ग मान आधुनिक मान
८ रत्ती का १ माशा = ८ रत्ती या १ माशा
४ मासे का १ शाण (टङ्क) = ४ माशे
६ मासे का १ गद्याण = ६ माशा (आधा तोला)
१० मासे का १ कर्ष = १ भर
४ कर्ष का १ पल = ४ भर
४ पल का १ कुडव = १६ भर (३ छ. १ भर)
२ कुडव की १ मानिका (शराव) = ३२ भर (६ छ. २ भर)
२ शराव का १ प्रस्थ = ६४ भर (१२ छ. ४ भर)