भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६६ भारत में अंगरेज़ी राज
नाना फड़नवीस को जब अंगरेज़ों के इरादों का पता चला
और मालूम हुआ कि गॉडर्ड की सेना गुजरात पहुँच गई है, तो
उसने एक ओर माधोजी सींधिया को सेना देकर गुजरात भेजा
ताकि वह गुजरात से अंगरेज़ों को बाहर निकाल दे और दूसरी
ओर मूदाजी भोंसले को आज्ञा दी कि तुम फ़ौरन तीस हज़ार सेना
लेकर बंगाल पर चढ़ाई कर दो । नाना की तजवीज़ें काफ़ो ज़बरदस्त
थीं; किन्तु नाना को उस समय पता न था कि माधोजी और
अंगरेज़ों में पहले ही गुप्त सन्धि हो चुकी थी और मूदाजी भोंसले
भी भीतर से वारन हेस्टिंग्स के साथ मिला हुआ था। माधोजी
का बाक़ी हाल आगे चल कर दिया जावेगा । मूदाजी ने नाना को
धोखे में रखने के लिए ३०,००० सेना लेकर बंगाल पर चढ़ाई
अवश्य की, किन्तु उसने पहले हो से वारन हेस्टिंग्स को एक गुप्त
पत्र लिख दिया कि—"मैं यह चढ़ाई केवल नाना फड़नवीस और
दूसरे मराठों को खुश करने के लिए कर रहा हूँ, यह केवल दिखावा
है। मैं मार्ग में जानकर इतनी देर लगा दूँगा कि बरसात से पहले
बंगाल की सरहद पर न पहुँच सकूँ और फिर बरसात का बहाना
लेकर बरार वापस लौट आऊँगा।" मूदाजी भोंसले ने हेस्टिंग्स के
' साथ अपने वचन का पालन किया। सारांश यह कि इन दोनों
मराठा सेनापतियों ने अपने स्वामी और देश दोनों के साथ
विश्वासघात किया ।
कर्नल गॉडर्ड अब सूरत में बैठा हुआ एक ओर नाना फड़नवीस
के पास सुलह के पत्र भेज रहा था और दूसरी ओर पूना पर