भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 535, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंपहला मराठा युद्ध २७१
और तुरन्त उसे बम्बई की कौन्सिल का वक़ील बनाकर पेशवा के
दरबार में भेज दिया गया ।
मराठों, हैदर और इतिहास लेखक ग्राण्ट डफ़ स्पष्ट शब्दों में
निज़ाम में फूट लिखता है—"बम्बई की गवरमेण्ट ने मि०
डालने के प्रयत्न मॉस्टिन को इस उद्देश से पूना भेजा कि वह
× × × मराठों को घर ही घर में एक दूसरे से लड़ा कर या जिस
तरीक़े से हो सके इस बात की कोशिश करे कि मराठे हैदर के
साथ या निज़ाम के साथ मिलने न पावें ।"*
गंगा के उत्तर में कुछ इलाक़ों पर उस समय तक मराठों का
क़ब्ज़ा हो चुका था और मिल के इतिहास से पता चलता है कि
सन् १७७३ में यदि आपसी घरेलू झगड़े मराठों को बाहर जाने से
न रोकते, तो वे इलाहाबाद, कड़ा, अवध और रुहेलखण्ड पर हमला
करने वाले थे ।†
इस तरह कम्पनी की उस समय की नीति के तीनों पहलू महत्व
पूर्ण और साफ़ थे ।
मॉस्टिन ने पूना पहुँच कर बड़ी होशियारी के साथ अपना
काम शुरू किया । स्वार्थान्ध राघोबा से उसे इस
नाना फडनवीस काम में पूरी मदद मिली । किन्तु पेशवा दरबार
की दूरदर्शिता में उस समय एक और दूरदर्शी नीतिज्ञ मौजूद था,
- "Mr. Mostyn was sent to Poona by the Bombay Government, for the
purpose of . . . using every endeavour, by fomenting domestic dissen-
sions or otherwise, to prevent the Marhattas from joining Hyder or Nizam
Ally."—Grant Duff's History of the Marhattas, p. 340.
† Mill's History of British India, p. 221.