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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 524

२६२ भारत में अंगरेज़ी राज
विषय में मुक़दमा चलाया गया। सुप्रसिद्ध विद्वान एडमएड बर्क
ने अपनी अमर वक्तृताओं में कम्पनी और वारन हेस्टिंग्स के उन
दिनों के कलुषित कृत्यों की ख़ूब पोल खोली। इन वक्तृताओं का
पढ़ना ब्रिटिश भारतीय इतिहास के प्रत्येक विद्यार्थी के लिए आवश्यक
है। सात साल तक मुक़दमा चलता रहा, किन्तु वास्तव में
इंगलिस्तान के सामने प्रश्न न्याय अन्याय का न था। प्रश्न था अंग-
रेज़ क़ौम के हित और अंगरेज़ क़ौम के राज का। वारन हेस्टिंग्स ने
जो कुछ किया था, अपनी क़ौम के हित के लिए और भारत में
अंगरेज़ी राज को मज़बूत करने के लिए किया था। इसलिए अन्त
में ब्रिटिश पार्लिमेण्ट ने उसे सब इलज़ामों से साफ़ बरी कर दिया।
इस तमाम मुक़दमे में वारन हेस्टिंग्स के क़रीब १० लाख रुपए
ख़र्च हुए, जो निस्सन्देह उसकी भारत की कमाई का केवल एक
हिस्सा था। कम्पनी के मालिकों ने फ़ौरन हरजाने के तौर पर
आइन्दा २८ साल तक के लिए चालीस हज़ार रुपए सालाना वारन
हेस्टिंग्स को देने का वादा किया, जिसमें से अधिकांश उन्होंने उसी
समय पेशगी अदा कर दिया। हेस्टिंग्स इससे कई गुना अधिक
कम्पनी को लाभ पहुँचा चुका था।
सर एलाइजाह इम्पे पर भी “रिश्वतें लेने, अन्याय करने, झूठी
गवाहियाँ बनाने, झूठे हलफ़नामे तसदीक़ करने”* इत्यादि का
* "Gross corruption, positive injustice, . . . . intentional violation
of the Acts under which he held his powers, . . . . having suborned
evidence and given to falsehood the sanctity of an affidavit"—Impeachment
of Sir Elijah Impey, December 12th, 1787