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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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वारन हेस्टिंग्स २४५
के गवरनर के अधीन कर दी गई और वारन हेस्टिंग्स कम्पनी के
समूचे भारतीय राज का पहला 'गवरनर-जनरल' नियुक्त हुआ ।
ऊपर लिखा जा चुका है कि मोहम्मद रज़ा ख़ाँ के विरुद्ध काम
[हाशिया: वारन हेस्टिंग्स पर इलज़ाम] निकालने के लिए वारन हेस्टिंग्स ने महाराजा
नन्दकुमार से बंगाल की नायबी का झूठा वादा
कर दिया था। किन्तु नन्दकुमार भी एक अर्से
से अंगरेज़ों की आँखों में खटक रहा था। उस झगड़े के बाद
नन्दकुमार ने एक लम्बी अर्ज़ी लिखकर कलकत्ते की कौन्सिल के
सामने पेश की, जिसमें उसने वारन हेस्टिंग्स पर बंगाल के रईसों
और ज़मींदारों से रिश्वतें लेने, ज़बरदस्ती धन वसूल करने, यहाँ
तक कि मुर्शिदाबाद के नवाब की माँ मुन्नी बेगम से रक़में वसूल
करने, लोगों को धोखा देने इत्यादि के अनेक इलज़ाम लगाए।
नन्दकुमार की अर्ज़ी में ठीक ठीक रक़में और पूरे नाम और पते
मौजूद थे। उसने शहादतें पेश करके अपने तमाम दावों को सच्चा
साबित कर दिया।
कौन्सिल के मेम्बरों ने नन्दकुमार के इलज़ामों को सच्चा
[हाशिया: महाराजा नन्दकुमार को फाँसी] स्वीकार किया।* किन्तु हेस्टिंग्स को कोई दंड
न मिल सका। उसने इस बात से ही इनकार
किया कि कौन्सिल को गवरनर के विरुद्ध
शिकायत सुनने का अधिकार है। हेस्टिंग्स ने नन्दकुमार के इलज़ामों
का जवाब देने के बजाय उलटा नन्दकुमार पर अब यह जुर्म लगाया

  • Minute of Council, 11th April, 1775.