भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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बुला लिया और एलिस को आज्ञा दे दी कि तुम फ़ौरन पटने पर
हमला करके नगर पर क़ब्ज़ा कर लो ।
२४ जून की रात को अचानक हमला करके एलिस ने पटने पर
[पटने पर अचानक] क़ब्ज़ा कर लिया । मीर क़ासिम की बरदाश्त
[रात के समय] की कोई हद न थी। इतिहास लेखक ऐल्फ़िन्स्टन
[हमला] लिखता है कि—"उसे ग़ुस्सा आने के बेशुमार
कारण थे, फिर भी उसने धैर्य और बरदाश्त से
काम लिया ।"* किन्तु अब मजबूर होकर उसे एलिस के विरुद्ध
सेना भेजनी पड़ी। मीर क़ासिम की सेना ने पटने पहुँच कर फिर
से नगर अंग्रेज़ों से विजय कर लिया। इस बार की लड़ाई में
कम्पनी के क़रीब ३०० यूरोपियन और ढाई हज़ार हिन्दोस्तानी
सिपाही काम आए। एलिस और उसके कई यूरोपियन साथी
पहिली जुलाई को क़ैद करके मुंगेर पहुँचा दिए गए।
ऐमयाट चुपके से किश्ती में बैठकर कलकत्ते की ओर भाग
गया। मीर क़ासिम ने हे को मुंगेर में रोक लिया।
[ऐमयाट की] मालूम होता है मीर क़ासिम ने अपने आदमियों
[मृत्यु] को हुकुम भेज दिया कि ऐमयाट को भी रोक कर
वापस मुंगेर भेज दिया जाए। क़ासिमबाज़ार के निकट नवाब के
एक कर्मचारी मोहम्मद तक़ी ख़ाँ ने अपने एक आदमी को भेजकर
- " . . . He conducted himself under innumerable provocations
with temper and forbearance, . . ."—Rise of the British power in India
by Elphinstone, pp. 390, 391.