भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 417, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंमीर क़ासिम १६५
"कहा जा सकता है कि पानीपत की लड़ाई के साथ साथ भारतीय
इतिहास का भारतीय युग समाप्त हो गया। इतिहास के पढ़ने वाले को इसके
बाद से दूरवर्ती पच्छिम से आए हुए व्यापारी शासकों की उन्नति से ही
सरोकार रह जाता है। "✡
निस्सन्देह जिस तिकोनिया संग्राम का हम ऊपर ज़िक्र कर चुके
पानीपत का परिणाम हैं, उसकी तीन शक्तियों में से अफ़ग़ानों को अब
और आगे बढ़कर दिल्ली सम्राट के निर्बल हाथों
से भारतीय साम्राज्य की बाग छीनने का साहस
न हो सकता था। मराठों की कमर टूट चुकी थी और वे अंगरेज़ों
के बढ़ते हुए प्रभाव को रोकने के लिए अब बंगाल तक पहुँचने के
नाक़ाबिल थे। इस तरह नन्दकुमार और उसके साथियों की
आशाओं पर पानीपत ने पानी फेर दिया।
एक अंगरेज़ लेखक साफ़ लिखता है :—
"पानीपत की लड़ाई से मराठा संघ को जो थोड़ी देर के लिए धक्का
पहुँचा उसकी वजह से मराठे बंगाल पर हमला करने से रुक गए। इस हमले
में शायद शुजाउद्दौला और शाह आलम मराठों के साथ मिल जाते और
मुमकिन है कि ये लोग अंगरेज़ कम्पनी की उस सत्ता को, जो अभी उस
समय तक कमज़ोर थी और अनेक कठिनाइयों से घिरी हुई थी, सफलता के
साथ उखाड़ कर फेंक देते।"†
- "With the battle of Panipat, the native period of Indian History may
be said to end. Henceforth the interest gathers round the progress of the
Merchant Princes from the far west."—India on the Eve of the British
Conquest, by Professor Sydney Owen.
† H. G. Keene's Madhava Rao Scindhia, p. 46.