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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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४८ भारत में अंग्रेज़ी राज
सेना देर तक सिराजुद्दौला के गोलों का सामना न कर सकी।
अंत में अंगरेज़ों को हार स्वीकार करनी पड़ी।
रविवार २० जून सन् १७५१ को सिराजुद्दौला की विजयी सेना
ने कलकत्ते की अंगरेज़ी कोठी में प्रवेश किया। कोठी के तमाम
अंगरेज़ क़ैद कर लिए गए। सिराजुद्दौला के लिए इस समय
कलकत्ते के इन बागी विदेशी व्यापारियों का वहीं एक एक कर
काम तमाम कर देना और उनकी कोठी को नेस्त नाबूद कर देना
एक बहुत आसान काम था, किन्तु उदार सिराजुद्दौला इन लोगों
के छलों से अभी तक पूरी तरह परिचित न हुआ था।
सिराजुद्दौला के हुकुम से क़िले के अन्दर एक दरबार लगा,
जिसमें तमाम यूरोपियन क़ैदी नवाब के सामने
सिराजुद्दौला की पेश किए गए। क़ैदियों ने नवाब से क्षमा की
उदारता प्रार्थना की। उदार भारतीय नवाब ने उन सब की
जानें बख़्श दीं।* अंगरेज़ इतिहास लेखक जेम्स मिल लिखता है —
“जब मिस्टर हॉलवेल (कलकत्ते की कोठी का मुखिया) हथकड़ी पहने
हुए नवाब के सामने पेश किया गया, तो नवाब ने फ़ौरन हुकुम दिया कि
हथकड़ी खोल दी जाय और स्वयं अपनी सिपहगरी की शपथ खाकर हॉलवेल
को विश्वास दिलाया कि “तुम्हारे या तुम्हारे किसी साथी के सर का एक
बाल भी किसी को छूने न दिया जायगा।”†
यही इतिहास लेखक स्वीकार करता है कि विजयी हिन्दोस्तानी

  • Talboys Wheeler's Early Records of British India, vol. i. p. 160.
    † History of India, by James Mill, vol, iii. p. 1179.