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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 282

३६ भारत में अंगरेज़ी राज
सदी के मध्य में बंगाल के अन्दर हमें यह लज्जाजनक दृश्य देखने को
मिलता है कि उस समय के विदेशी ईसाई कुछ हिन्दुओं के साथ
मिलकर देश के मुसलमान राज के ख़िलाफ़ ग़दर करने और उस राज
को नष्ट करने के षड्यंत्र रच रहे थे। अंगरेज़ कम्पनी के गुप्त मदद-
गारों में मुख्य कलकत्ते का एक मालदार पञ्जाबी व्यापारी अमीचंद
था। उसे इस बात का लालच दिया गया कि नवाब को ख़तम कर
मुर्शिदाबाद के ख़जाने का एक बड़ा हिस्सा इन सेवाओं के बदले में
तुम्हें दे दिया जायगा और “इंगलिस्तान में तुम्हारा नाम इतना
अधिक होगा जितना भारत में कभी न हुआ था।” कम्पनी के मुला-
ज़िमों को आदेश था कि “अमीचंद की ख़ूब खुशामद करते रहो।”*
अंगरेज़ षड्यंत्रकारियों में एक ख़ास नाम इस समय करनल
स्कॉट का मिलता है। करनल स्कॉट ने बहुत दिनों बंगाल में रह
कर खूब मेल जोल बढ़ाया और अमीचंद की मदद से चुपके चुपके
कई बड़े बड़े हिन्दू राजाओं और रईसों को अपनी ओर मिला
लिया। अमीचंद के धन और अंगरेज़ कम्पनी के झूठे सच्चे वादों
ने मिलकर नवाब के अनेक दरबारियों और सम्बन्धियों की नियत
को डाँवा डोल कर दिया।
उधर कलकत्ते में अंगरेज़ों और चंदरनगर में फ़्रांसीसियों की
क़िलेबंदियाँ बराबर जारी थीं।
नवाब अलीवर्दी ख़ाँ को इन सब बातों का थोड़ा बहुत पता
चल गया। उसे इस बात का भी पता चल गया कि दक्खिन में

  • Clive's letter to Watts.