भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६ भारत में अंगरेज़ी राज
सदी के मध्य में बंगाल के अन्दर हमें यह लज्जाजनक दृश्य देखने को
मिलता है कि उस समय के विदेशी ईसाई कुछ हिन्दुओं के साथ
मिलकर देश के मुसलमान राज के ख़िलाफ़ ग़दर करने और उस राज
को नष्ट करने के षड्यंत्र रच रहे थे। अंगरेज़ कम्पनी के गुप्त मदद-
गारों में मुख्य कलकत्ते का एक मालदार पञ्जाबी व्यापारी अमीचंद
था। उसे इस बात का लालच दिया गया कि नवाब को ख़तम कर
मुर्शिदाबाद के ख़जाने का एक बड़ा हिस्सा इन सेवाओं के बदले में
तुम्हें दे दिया जायगा और “इंगलिस्तान में तुम्हारा नाम इतना
अधिक होगा जितना भारत में कभी न हुआ था।” कम्पनी के मुला-
ज़िमों को आदेश था कि “अमीचंद की ख़ूब खुशामद करते रहो।”*
अंगरेज़ षड्यंत्रकारियों में एक ख़ास नाम इस समय करनल
स्कॉट का मिलता है। करनल स्कॉट ने बहुत दिनों बंगाल में रह
कर खूब मेल जोल बढ़ाया और अमीचंद की मदद से चुपके चुपके
कई बड़े बड़े हिन्दू राजाओं और रईसों को अपनी ओर मिला
लिया। अमीचंद के धन और अंगरेज़ कम्पनी के झूठे सच्चे वादों
ने मिलकर नवाब के अनेक दरबारियों और सम्बन्धियों की नियत
को डाँवा डोल कर दिया।
उधर कलकत्ते में अंगरेज़ों और चंदरनगर में फ़्रांसीसियों की
क़िलेबंदियाँ बराबर जारी थीं।
नवाब अलीवर्दी ख़ाँ को इन सब बातों का थोड़ा बहुत पता
चल गया। उसे इस बात का भी पता चल गया कि दक्खिन में
- Clive's letter to Watts.