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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 248

४ भारत में अंग्रेज़ी राज
सब से पहले स्पेन, पुर्तगाल, हॉलैण्ड (ओलन्दाज़), इङ्गलिस्तान
और फ्रांस इन पाँच देशों के लोगों ने एक दूसरे के बाद जल-मार्ग
से भारत पहुँचने के प्रयत्न शुरू किए। ये प्रयत्न सौ साल से
ऊपर तक जारी रहे। भूगोल का ज्ञान और दिशाओं का बोध भी
उन दिनों यूरोपनिवासियों को आज जैसा न था। भारत पहुँचने
के लिए कोई वीर अपना जहाज़ लेकर उत्तर की ओर बढ़ा चला
जाता था, कोई उत्तर-पूरब की ओर, कोई उत्तर-पच्छिम की ओर,
कोई पच्छिम की ओर और कोई दक्खिन की ओर। नतीजा यह
हुआ कि इनमें से अधिकांश प्रयत्न निष्फल गए, जिनमें बहुत सी
जानें गईं, अनेक जहाज़ बरबाद हुए और काफी धन नष्ट हुआ।
फिर भी इन कष्टों और विपत्तियों में साहसी यूरोपनिवासियों ने
हिम्मत न हारी और स्पेन, पुर्तगाल, हॉलैण्ड, इङ्गलिस्तान तथा
फ्रांस के नाविकों के दरमियान भारत का जल-मार्ग ढूंढ़ निकालने
के लिए लाग डाट बराबर बढ़ती गई।
सब से पहला यूरोपियन नाविक, जिसने इस बात का बीड़ा
[हाशिया: भारत की खोज] उठाया, इतालिया का रहने वाला सुप्रसिद्ध
[हाशिया: में कोलम्बस] कोलम्बस था। स्पेन के राजा ने कोलम्बस को
बड़ी मदद दी। भारत पहुँचने के लिए वह
यूरोप से ठीक पच्छिम की ओर बढ़ा चला गया। उसका जहाज़
सन् १४९२ ई० में अमरीका के किनारे जा लगा। अमरीका महाद्वीप
का पता लगाने और उससे आजकल के यूरोप का सम्बन्ध जोड़ने
का श्रेय कोलम्बस को प्राप्त हुआ, जिसका प्रभाव यूरोप और संसार