भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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गुण है, और भारत ने अपने पिछले हज़ारों साल के इतिहास में इस गुण
को अन्य देशों की अपेक्षा ख़ासी सुन्दरता के साथ निबाहा है।
यदि स्वदेशी और विदेशी की इस परिभाषा को स्वीकार न किया जाय
तो भारत, इंगलिस्तान, जरमनी, फ़्रान्स या संसार का कोई भी देश इस
समय ऐसा नहीं है, जो पूरी तरह विदेशियों से बसा हुआ न हो। फिर न
इंगलिस्तान के एङ्गलो सेक्सन वहां के असली बाशिन्दे माने जा सकते हैं
और न जर्मनी या हिन्दोस्तान के 'आर्य' जिन्हें अपने देशों का इस समय
ख़ासा गर्व है। सच यह है कि जिस बाबर ने पानीपत में इब्राहीम लोधी
को परास्त किया वह बाबर विदेशी था, किन्तु जिस बाबर ने दिल्ली में अपना
साम्राज्य क़ायम करके तातार और ईरान से अपना सम्बन्ध सदा के लिए
तोड़ कर भारत को अपना देश बना लिया वह बाबर भारतवासी था। बाद
के मुग़ल सम्राटों में से किसी सम्राट की किसी नीति विशेष का कोई नतीजा
चाहे भारत के लिए हितकर रहा हो या अहितकर, चाहे सम्राट अकबर के
समान उनमें से किसी ने हिन्दू और मुसलमानों को एक दृष्टि से देखा हो,
या चाहे औरङ्गज़ेब के समान किसी तरह के भी भेद भाव द्वारा अपने शासन
को बदनाम किया हो, फिर भी वे सब सम्राट भारतवासी थे और उनका
साम्राज्य स्वाधीन भारतीय साम्राज्य था।
मानव धर्म
हम फिर भारत की उस समय की धार्मिक लहरों की ओर आते हैं।
रामानुज के धार्मिक विचारों और उसके भक्तिमार्ग को दक्खिन से