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भक्तियोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

भक्तियोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

Bhakti Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)

स्वामी विवेकानन्द / प्रा. डॉ. विद्याभास्कर शुक्ल द्वारा

DevanagariHindipublished140 पृष्ठ

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अनुक्रमणिका

विषयपृष्ठ
१. भक्ति के लक्षण... ... १
२. ईश्वर का स्वरूप... ... १४
३. भक्तियोग का ध्येय—प्रत्यक्षानुभूति...... ... २४
४. गुरु की आवश्यकता... ... २८
५. गुरु और शिष्य के लक्षण... ... ३३
६. अवतार... ... ४२
७. मंत्र... ... ४७
८. प्रतीक तथा प्रतिमा-उपासना... ... ५१
९. इष्टनिष्ठा... ... ५५
१०. भक्ति के साधन... ... ५९

पराभक्ति

११. पराभक्ति—त्याग... ... ६७
१२. भक्त का वैराग्य—प्रेमजन्य... ... ७२
१३. भक्तियोग की स्वाभाविकता और उसका रहस्य... ७८
१४. भक्ति के अवस्था-भेद... ... ८२
१५. सार्वजनीन प्रेम... ... ८५
१६. पराविद्या और पराभक्ति दोनों एक हैं...... ९२
१७. प्रेम—त्रिकोणात्मक... ... ९४
१८. प्रेममय भगवान स्वयं अपना प्रमाण हैं.... १००
१९. दैवी प्रेम की मानवी विवेचना... ... १०४
२०. उपसंहार... ... ११४