संग्रह पर लौटें


भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)
Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas
सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished690 पृष्ठ
पृष्ठ 689स्थायी लिंक
६४६ श्रीस्वामीचरणदासजीकाग्रन्थ ।
जगतसिन्धुसम जानिए, धरम जहाज पिछांत ॥ १३ ॥
यामें जो कोई चढ़ै, सोई उतरै पार ।
रहिजावै अभिमानसूं, सो डूबै मँझधार ॥ १४ ॥
सतगुरु बिन डूब सबी, रामभक्ति नहिं जान ।
सतसंगत आवै नहीं, करके बहु अभिमान ॥ १५ ॥
नासकेत की कथा कूं, कहै सुनै चितलाय ।
पाप तजै अरु पुन्यकरै, बसै स्वर्ग वह जाय ॥ १६ ॥
शुकदेव के परतापसूं, कह्यो नासहीकेत ।
पाप पुण्य के भेदकूं, समझन कारण हेत ॥ १७ ॥
इति श्रीश्यामचरनदासजीकृते नासकेतोपाख्याने शुभाशुभनिर्णय-
वर्णननामाष्टादशोऽध्यायः ॥ १८ ॥
संपूर्णः ॥
पृष्ठ 690स्थायी लिंक
इस चित्र में कोई पाठ (टेक्स्ट) उपलब्ध नहीं है, यह पृष्ठ पूरी तरह से रिक्त (blank) है।