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सर्वकोश
भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

भक्ति सागर ग्रन्थ: सन्त चरनदास (अष्टांग योग, धर्म-संवाद एवं सम्पूर्ण भक्ति रस महाकोश)

Bhakti Sagar Granth of Swami Charandas

सन्त चरनदास जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished690 पृष्ठ

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पृष्ठ 6

श्रीरामकृष्णाय नमः ॥
( प्रस्तावना )
श्रीमत् परब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्णचन्द्र आनन्दकन्द परम
दयानिधान और करुणा कृपाकी खान हैं कि जो कोई सद्-
भक्ति भाव से जिस किसी लौकिक अलौकिक पदार्थ की
प्राप्ति होनेकी प्रार्थना किया करता है उसीको अपनी कृपादृष्टि से
अवश्यही पूर्ण करते हैं । हमारे श्री मुंशी नवलकिशोर प्रेसमें
सबसे प्रथम श्रीस्वामी श्यामचरणदास जी महाराज का रचित
ग्रन्थ भक्तिसागर छापा जाकर जगत्प्रसिद्ध किया गया जिसके
पश्चात् और २ प्रेसों में भी उक्त ग्रन्थके छापने के उद्योगी हुये
ग्रन्थके छप जाने के पश्चात् हमको विदित हुआ कि श्रीभक्ति-
सागरग्रन्थ के सिवाय श्रीस्वामीजी महाराज की रचित और
भी महाबानी सन्तनमनमानी श्यामचरणदासीय सन्तों के
खास २ स्थानों में मौजूद है वह किसी प्रकार से प्राप्त हो सके
तो ग्रन्थ भक्तिसागर के साथ ही परिशिष्टभाग के नामसे
छापकर लोकहित के लिये प्रकाशित करदी जाय इसही
विचार के अवसरपर सन् १६१६ ईसवी में श्रीमान् पण्डित
शिवदयालुजी गौड़ हरिसम्बन्धी नाम सरसमाधुरीशरणजी
जयपुर निवासी मुक्तिमार्ग ग्रन्थ स्वामी रामरूपजी रचित के
छपानेके निमित्त लखनऊ पधारे उन्हों से वार्तालाप होनेसे
मालूम हुआ कि भक्तिसागरग्रन्थ के अतिरिक्त और वाणी
श्रीस्वामी श्यामचरणदासजी की लिखित पुस्तक मौजूद है
हमने उस वाणी की १ प्रति लिखाकर प्रेसमें छपजानेके लिये