सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 89, कुल 380 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 89

६२ ] भक्तिरसामृतसिन्धु

सार्वभौम विधान किया है; परम अकिंचन मनुष्य भी इसका पालन कर
सकता है । परन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि वैभवपूर्ण अर्चन करने में समर्थ
पुरुष भी भगवान् को केवल जल और पत्र-पुष्प से तुष्ट करे। वैभव के
अनुसार सुन्दर आभूषणों, पुष्पों, नैवेद्यों का अर्पण करना चाहिए। ऐसा
नहीं कि भगवान् को तो जल और पत्र-पुष्प से प्रसन्न करे और सारे धन का
अपनी इन्द्रियतृप्ति में व्यय करे); २५. श्रीकृष्ण को अर्पण किए बिना कुछ
न खाय; २६. ऋतु के फल और अन्न का श्रीकृष्ण को निवेदन करना न
भूले; २७. भोजन का भोग लगाने से पूर्व किसी को भी न खिलाये;
२८. मूर्ति की ओर पीठ न करे; २६. गुरु को प्रणाम चुपचाप न करे, अर्थात्
प्रणाम करते हुए गुरु-प्रणति का उच्च स्वर से पाठ करे; ३०. गुरु के
सांनिध्य में स्तवपाठ करना न भूले; ३१. गुरु के आगे आत्मप्रशंसा न करे;
३२. मूर्ति के समक्ष देवनिन्दा न करे ।
यह ३२ अपराधों की सूची है इनके अतिरिक्त 'वराहपुराण' में कुछ
अन्य अपराधों का उल्लेख है : १. अन्धकार में मूर्ति का स्पर्श न करे; २.
मूर्ति-अर्चन के विधि-विधान के दृढ़ पालन में प्रमाद न करे; ३. ध्वनि
किए बिना मन्दिर में प्रविष्ट न हो; ४. कुत्ते आदि अधम पशुओं की
दृष्टि से दूषित पदार्थ भगवान् को अर्पित न करे; ५. आराधना के काल में
मौनभंग न करे; ६. पूजन करते हुए मूत्रपुरीषोत्सर्ग न करे; ७. पुष्प का
अर्पण किए बिना धूप न दिखाना; ८. गन्धरहित पुष्पों को अर्पित न
करना; ६. प्रतिदिन अच्छी प्रकार से दन्तधावन करना; १०. मैथुन के बाद
तत्काल मन्दिर में प्रवेश न करना; ११. रजस्वला स्त्री का स्पर्श न करना;
१२. मृतदेह का स्पर्श करके मन्दिर में प्रवेश न करना; १३. लाल, नीले,
अस्वच्छ वस्त्रों को धारण किए हुए मन्दिर में न जाना; १४, मृतदेह का
दर्शन करके मन्दिर में न जाना; १५. मन्दिर में अधोवायु न छोड़ना;
१६. मन्दिर में क्रोध न करना; १७. श्मशान जाकर मन्दिर में न जाना;
१८. मूर्ति के आगे डकार न लेना। जब तक भोजन का पूर्ण पाचन न हो
गया हो, मन्दिर में प्रवेश न करे; १६. चरस, गांजा का प्रयोग न करे; २०.
अफीम आदि मद्य पदार्थों का सेवन न करे; २१. शरीर पर तेल लगाकर
मन्दिर में प्रवेश अथवा मूर्ति का स्पर्श न करे। २२. भगवान् परम ईश्वर हैं—
ऐसा प्रतिपादन करने वाले किसी भी शास्त्र का अपमान न करे; २३. किसी
विरोधी शास्त्र का प्रवर्तन न करे; २४. मूर्ति के आगे पान न चबाए;
२५. अशुद्ध पात्र में रखे पुष्प को न चढ़ाये; २६. आसन के बिना भूमि पर
बैठ कर भगवत्-अर्चन न करे; २७. स्नान पूरा करने से पूर्व मूर्ति का स्पर्श