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सर्वकोश
भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 373, कुल 380 में से

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पृष्ठ 373

३ ४६] भक्तिरसामृतसिन्धु
और पित्त से परिपूर्ण जीवित शव को कान्ताभाव से भजती है।” इस
वाक्य में उन तत्त्वों का वर्णन है जिनसे प्राकृत शरीर बना है। परन्तु
इसमें कोई रसाभास नहीं है क्योंकि इससे जड़ और चेतन का यथार्थ
विवेक प्रकट होता है।
विदग्धमाधव (२.३१) में श्रीकृष्ण अपने सखा से कहते हैं, “हे
सखे ! कैसा आश्चर्य है कि जबसे मैंने राधारानी के सुन्दर नयनकमलों
को देखा है तब से चन्द्रमा और कमल को देखकर उद्गमन करने लगा हूँ।”
यह बीभत्स मिश्रित मधुररस का वर्णन है; परन्तु यहाँ कोई रसाभास
नहीं है।
निम्नलिखित वाक्य में नाना प्रकार के भक्तिरसों का उल्लेख है—
“रंगभूमि में युद्ध की सज्जा से विभूषित अजित श्रीकृष्ण को विजयी देख
कर उनके सखा ग्वालों के शरीर रोमांच को और शत्रुओं के शरीर कालिमा
को प्राप्त हो गये।” इस वाक्य में यद्यपि वीररस और भयानक रस का
मिश्रण है; परन्तु कोई रसाभास प्रतीत नहीं होता।
एक मथुरानिवासिनी ने अपने पिता से द्वार खोलकर उसके साथ
सांदीपनी मुनि के यहाँ श्रीकृष्ण को खोजने जाने का निवेदन किया ।
उसका उपालम्भ था कि श्रीकृष्ण ने उसके चित्त को हर लिया है। इस
घटना में मधुर और वत्सलरस का मिश्रण होते हुए भी रसाभास
नहीं है ।
एक ब्रह्मानन्दी का उद्गार इस प्रकार है, “उन परब्रह्म सच्चिदा-
नन्दघन भगवान् श्रीकृष्ण को मैं कब देख सकूँगा जिनका वक्षःस्थल रुक्मिणी
के स्तनों का स्पर्श करने से उस पर लगे लाल कुंकुम से उपलिप्त हो गया
है ।” इस भाव में मधुर और शान्तरस का मिश्रण है। यद्यपि ये दोनों
विरोधी रस हैं, परन्तु यहाँ कोई रसाभास नहीं है, क्योंकि एक ब्रह्मानन्दी
भी श्रीकृष्ण की ओर आकृष्ट हो सकता है ।
नन्द महाराज ने अपनी गृहिणी से कहा, “हे प्रिये ! तुम्हारा मल्लिका
के समान कोमल और मृदु पुत्र कृष्ण आज पर्वत जैसे बलिष्ठ केशी दानव
को मारने गया है। अतएव मुझे चिन्ता हो रही है। परन्तु भय की कोई
बात नहीं, तुम्हारे पुत्र का सब प्रकार से कल्याण हो । अपने स्तम्भ जैसे
भुजदण्ड को उठाकर केशी दानव को मारकर सारे व्रजमण्डल के निवासियों
को चिन्ता से मुक्त कर देगा ।” इस वाक्य में वीररस और भयानक रस
दोनों हैं। परन्तु दोनों से वत्सलरस बढ़ता है। अतएव दोनों में विरोध
नहीं है ।