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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 364, कुल 380 में से

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पृष्ठ 364

रसों की मैत्री वैर स्थिति [ ३ ३७
दोनों के अतिरिक्त अन्य, सब अभिव्यक्तियों को माधुर्यरस के विपरीत
समझा जाता है ।
हास्यरस के भयानक, मधुर तथा वात्सल्य—ये तीनों रस मित्र हैं
तथा करुण और बीभत्स ये दोनों विरोधी हैं ।
वीर और शान्त—ये दोनों अद्भुतरस के मित्र हैं; परन्तु रौद्र और
भयानक, दोनों विरोधी हैं ।
वीररस के मित्र अद्भुत, हास्य तथा दास्यरस हैं, जबकि भयानक
और माधुर्य ये दोनों विरोधी हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार शान्तरस सदा
वीररस का मित्र है ।
करुणभक्तिरस के मित्र हैं रौद्र और वात्सल्य । हास्य, माधुर्य तथा
अद्भुत विरोधी हैं ।
रौद्रभक्तिरस के साथ करुण अथवा वीररस के मिलने की मैत्री
स्थिति है; जबकि हास्य, माधुर्य, अथवा भयानक वैरी हैं ।
भयानक भक्तिरस के साथ बीभत्स तथा करुणरस मित्र हैं।
वीरभक्तिरस के साथ मधुर, हास्य और रौद्ररस का मिश्रण सदा
मित्र स्थिति में होता है ।
बीभत्सभक्तिरस में शान्त, हास्य और दास्य मित्र रस हैं, जबकि
सख्य और माधुर्य वैरी हैं ।
उपरोक्त विश्लेषण रसाभास के अध्ययन का सार संकलन है ।
रसाभास की यह दिव्य विद्या भक्ति के उन सभी रसों को पूर्ण रूप से
समझा सकती है जो एक दूसरे के परस्पर मित्र और विरोधी हैं । जिस
समय भगवान् चैतन्य महाप्रभु जगन्नाथपुरी में विराज रहे थे, उस समय
अनेक कवि और भक्त उनके पास आकर अपने नाना प्रकार के काव्यों का
समर्पण करते थे । परन्तु यह नियम था कि श्रीचैतन्यदेव के निजी सचिव
स्वरूप दामोदर पहले इन सब रचनाओं का बड़ी गम्भीरता से विश्लेषण
करते थे । जब वे पाते कि इनमें कोई रसाभास नहीं है, तभी श्रीचैतन्यदेव
के निकट जाकर कोई अपने काव्य का पाठ कर सकता था ।
रसाभास का विषय बड़ा महत्त्वपूर्ण है । जो शुद्ध भक्त हैं वे भगवान्
से नाना रसों (सम्बन्धों) के विवरण में सदा पूर्ण मैत्री देखने की आशा
रखते हैं । रसों की मैत्री अथवा विरोध का अध्ययन कभी-कभी बड़ा जटिल
हो जाता है । इसके कारण की ओर निम्नलिखित संकेत है । जब दो मित्र
आपस में मिलते हैं तो इस मिलन से उत्पन्न रस को प्रायः अत्यन्त मित्र
रस माना जाता है । परन्तु वास्तव में मित्रों के ऐसे मिलन में इतने प्रकार