भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३ १८ ] भक्तिरसामृतसिन्धु
आओ बिना कोई उत्पात किये चुपचाप दही-मक्खन की चोरी करें।" परन्तु
वह बुढ़िया जटिला सोई नहीं थी । वह चुपचाप लेटी हुई थी। ऐसे में वह
अपनी हँसी को नहीं रोक सकी और उसके दाँत बिल्कुल स्पष्ट दिखने लगे ।
यह विहसित हँसी है।
जिसमें नाक फूल जाये और आँखें बन्द हो जायें, इस प्रकार की हँसी
को अवहसित कहते हैं। एक दिन प्रातःकाल जब श्रीकृष्ण रासलीला रचा
कर घर लौट रहे थे तो उनके मुखमण्डल को देखकर यशोदा मैया कहने
लगीं, "हे पुत्र ! तेरी आँखों में इतना धातुराग क्यों लग रहा है ? क्या
तूने बलदेव की वेशभूषा तो धारण नहीं कर ली है ?" जब यशोदा मैया
श्रीकृष्ण से इस प्रकार कह रही थीं तो निकट खड़ी गोपांगना जोर-जोर से
हँसने लगी । उसकी नाक फूल गई और आँखें बन्द हो गईं । यह अवहसित
हँसी है। गोपी जानती थी कि श्रीकृष्ण रासलीला का आनन्द ले रहे थे ।
यशोदा मैया को अपने पुत्र की इन क्रियाओं का पता नहीं था, इसीलिये
वे यह न जान पाईं कि उसके मुख पर गोपियों का अंगराग लगा हुआ है।
जिस हँसी में आँखों से आँसू आ जायें और कन्धे हिलने लगें उसे
अपहसित कहते हैं । जरती की धुन पर बालकृष्ण को नाचता देखकर
नारद को बड़ा आश्चर्य हुआ । जो श्रीभगवान् ब्रह्मा आदि देवताओं को
नचाते हैं वे ही अब एक वृद्धा दासी के संकेत के अनुसार नाच रहे हैं। इस
आनन्द को देखकर नारदजी भी नाचने लगे; उनके कन्धे काँपने लगे और
नेत्र चपल हो उठे । हँसी के कारण उनके दाँत भी फूट पड़े । इस प्रकार
: उनके दाँतों से निकली ज्योति से आकाश के बादल सुप्रभ हो गए ।
जब कोई हँसते हुए ताली बजा-बजाकर हवा में कूदता है तो उसे
अतिहसित कहते हैं। इसका प्रदर्शन निम्नलिखित प्रसंग में है। श्रीकृष्ण ने
जरती से कहा, "हे भद्रे ! तुम्हारी त्वचा पर झुर्रियाँ पड़ जाने के कारण
तुम्हारा मुख अब बिल्कुल बन्दरों के समान हो गया है। अतएव बन्दरों के
राजा बलिमुख ने तुम्हें अपनी जीवन-संगिनी बनाने का निश्चय किया है।"
जिस समय श्रीकृष्ण जरती को इस प्रकार चिढ़ा रहे थे, उसने उत्तर दिया
कि वह पहले ही निश्चित कर चुकी है कि नाना प्रकार के बलि असुरों का
नाश करने वाले श्रीकृष्ण को छोड़कर और किसी से विवाह नहीं
करेगी।" वातुल जरती के इस परिहास को सुनकर वहाँ खड़ी सब
गोपांगनाएँ हाथ बजा-बजा कर जोर-जोर से हँसने लगीं। इसी का नाम
'अतिहसित' है।
कभी-कभी अप्रत्यक्ष रूप से हँसाने वाले वाक्यों से भी अतिहसित