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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 200, कुल 380 में से

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पृष्ठ 200

[ १७५ ]
अध्याय २४
श्रीकृष्ण के वैशिष्ट्य
भगवान् श्रीकृष्ण के विविध ऐश्वर्यों का वर्णन करके श्रील रूप
गोस्वामी उनके निम्नलिखित गुणों और आठ माधुरियों का वर्णन करते
हैं : शोभा, विलास, माधुर्य, मंगल्य, स्थैर्य, तेज, लालित्य तथा उदारता । ये
आठ गुण सामान्यतः महापुरुषों के लक्षण माने जाते हैं ।
शोभा
दीनों पर दया, शौर्य, स्पर्धा, उत्साह, दक्षता तथा सत्य—इन गुणों
से शोभित व्यक्ति महापुरुष माना जाता है । गोवर्धन-धारण-लीला में सभी
शोभायें श्रीकृष्ण में प्रकट हुई थीं । उस समय सम्पूर्ण वृन्दावन धाम पर
इन्द्र के मेघ मूसलाधार वर्षा का उत्पात कर रहे थे । पहले श्रीकृष्ण स्वर्ग का
नाश करने के लिए उद्यत हुए, परन्तु फिर देवराज की तुच्छता का विचार
करके इन्द्र पर दयार्द्र हो गए । श्रीकृष्ण के क्रोध को कोई नहीं सह सकता;
अतः इन्द्र का प्रतिकार करने के स्थान पर अपने प्रिय व्रजवासियों की
रक्षा के लिए गोवर्धन-धारण करके उन्होंने उनके लिए अपनी दया ही
प्रकट की ।
विलास
जो पुरुष सदा प्रसन्न रहता है और मुस्कराते हुए बात करता है,
उसे विलासी समझना चाहिए । श्रीकृष्ण में यह गुण उस समय प्रकट हुआ
जब वे कंस के यज्ञमण्डप में पधारे । वहाँ वर्णन है कि मत्तनयन श्रीकृष्ण
ने किसी के प्रति अविनय का प्रदर्शन किए बिना मल्लों के मध्य में प्रवेश
किया जब उन्होंने उन पर स्थिर दृष्टिपात किया तो ऐसे लगे मानो गजराज
वनस्पति को उखाड़ रहा हो । इस प्रकार स्मितकान्ति से युक्त श्रीकृष्ण
वीरतापूर्वक रंगमंच पर चढ़ गए ।
माधुर्य
जिसकी चेष्टा आदि स्पृहणीय हों, उसे मधुर कहते हैं । श्रीकृष्ण के