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सर्वकोश
बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 पृष्ठ

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बावन कसनी ( कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई ) 5

दो शब्द

कबीर साहिब ने संसार में आकर धार्मिक पाखण्ड पर करारे प्रहार किये और सत्य-भक्ति का डंका बजाया। ऐसे में धार्मिक पाखण्डी मचल उठे। उन्होंने साहिब की जमकर निंदा की। उन्होंने साहिब की छवि को बिगाड़ने के लिए उन पर आरोपों की झड़ी लगा दी, पर साहिब नहीं रुके। उन्होंने पाखण्डियों से लाखों लोगों को बचा लिया। भोले-भाले लोगों को अपने चंगुल से छूटते देख पाखण्डियों ने साहिब को अपने रास्ते से हटाने के लिए मार डालने की योजनाएँ बनाईं। उन्हें मारने के लिए अनेक षड्यंत्र रचे गये।

दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी के गुरु पीर और वज़ीर शेख तकी की सहायता से पाखण्डियों ने कबीर साहिब की 52 बार कसनी ली। अनेक बार उन्हें मौत की सज़ा दी गयी। बादशाह ये सज़ाएँ साहिब को नहीं देता था। पर अपने धर्मगुरु पीर शेख तकी के आगे उसका वश भी नहीं चलता था। इसलिए उसने मजबूर होकर शेख तकी से यह कह दिया था कि तू जो चाहे कर, पर मैं कुछ नहीं करूँगा। वो बार-बार शेख तकी को समझाता भी था कि कबीर पर इतने जुल्म मत कर, वो सच्चा फ़कीर है, वो खुदा का रूप है। पर शेख तकी नहीं मानता था। वो साहिब पर जुल्म-पर-जुल्म करता जाता था और इस तरह उसने साहिब जी को 52 बार सजाए मौत दी, जिसे बावन कसनी भी कहा जाता है। पहले तो वो साहिब को जादूगर समझता था, पर आख़िर में उसे आभास हुआ कि साहिब इंसान नहीं हैं; वे तो स्वयं मालिक हैं और जीवों के कल्याण के लिए संसार में आए हैं।

तो धार्मिक पाखण्डियों ने शेख तकी की सहायता से कबीर साहिब की 52 बार जो कसनियाँ लीं, उन्हें मौत की जो-जो सज़ाएँ दीं, वे आगे चित्रों सहित दी गई हैं-