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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 492, कुल 774 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 492

अक्षितमित्याह॑ । यदेवास्य शयानस्योपशुष्यति तदेवास्मैतेना-"

Line 11:
"प्याययतीति ब्राह्मणम्॑ ॥ ५ ॥ द्वितीयः ॥"
Wait, look at "द्वितीयः":
द्वि - ती - य - ः = "द्वितीयः"!
Wait, before "द्वितीयः", there is: "॥ ५ ॥"
So this ends Khanda 5, and then "द्वितीयः ॥" (indicating the second anuvaka/adhyaya or similar, or rather "द्वितीयः" is the heading or colophon).

Now Line 12:
"अथ वै भवति यो वै पवमानानामन्वारोहान्विदान्यजते"
Wait, let's check:
"अथ वै भवति यो वै पवमानानामन्वारोहान्विदान्यजते"
Wait, look at "न्विदान्यजते":
न् (n)
वि (vi)
दा (dā)
न् (n)
य (ya)
ज (ja)
ते (te)
Wait, "न्विदान्यजते" = न् विदान् यजते, or "न्विद्वान्यजते"?
Look at the letter:
वि (vi)
द्वा (dvā) or दा (dā)?
Look at line 19-20:
Line 19 end: "य एवं विद्वा-"
Line 20 start: