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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 483, कुल 774 में से

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पृष्ठ 483

तपो ऽतप्यत स सर्पानसृजत सो ऽकामयत प्रजाः सृजे-
येति स द्वितीयमतप्यत स वयांस्यसृजत सो ऽका-
मयत प्रजाः सृजेयेति स तृतीयमतप्यत स एतं दौक्षि-
तवादमपश्यत्तंमवदत्ततो वै स प्रजा असृजतेति तत्पृच्छन्ति कतमत्तत्तपो यत्तपस्तप्त्वा दौक्षितवादं वदतीत्यथ वै भवत्य-
ङ्गिरसः सुवर्गं लोकं यन्तो ऽप्सु दौक्षातपसी प्रावेशयंत्सु
...क्षाति ... साक्षादेव दौक्षातपसी अवरुन्द्ध इत्येतदिति"
WAIT!
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Look at line 7 end and line 8:
Line 7: "...प्रावेशयन्त्स-" or "...प्रावेशयन्त्सु"?
Wait, look at the end of line 7:
There is: "प्रावेशयन्त्सु" - wait, look at the character after 'सु':
Is there an avagraha or something?
Wait, look at line 8:
There is a space:
Wait, is the word "...क्षाति॑"?
Look at the characters of line 8:
Under "सुवर्गं" in line 7, there is:
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