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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

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पृष्ठ 407

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अथाच्छाभिसर्प यजमान माहेन्द्रं ग्रहं ग्रहीष्यामीत्यन्वारब्धे
यजमाने माहेन्द्रं ग्रहं गृह्णाति सहाᳵ इन्द्रो य ओजसेत्यनु-
द्रुत्योपयामगृहीतो ऽसि महेन्द्राय त्वा जुष्टं गृह्णामीति ।
परिमृज्य सादयत्येष ते योनिर्महेन्द्राय त्वेति । तदेतान्पञ्चै-
न्द्रानतिग्राह्यान्मह संसादयंत्यथाप७ उपस्पृश्य बर्हिषी
Wait! Look at line 13:
"संसादयंत्यथाप७" -> footnote 7 is here!
Look at line 13: "संसादयंत्यथाप" or "संसादयत्यथाप"?
Wait, look at footnote 7:
"७ ० सादयंत्य० MH Keś."
And in the text (line 13):
"संसादयत्यथाप७" or "संसादयंत्यथाप"?
Wait! Footnote 7 says: "७ ० सादयंत्य० MH Keś."
That means the text has "संसादयत्यथाप" (singular), and MH Keś. have "संसादयन्