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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 304, कुल 774 में से

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पृष्ठ 304

Wait, footnote 5 is after 'वा': "वा५"
"मासांस्तापचिते ऽग्नौ '"
"प्रवर्ग्यं६" (superscript 6 after प्रवर्ग्यं).

Line 12:
"अनूचित्वा संवत्सरं न मांसमश्नीयान्न रामामुपेयान्न मृन्मयेन"
Let's check every word:
"अनूचित्वा" -> अ-नू-चि-त्वा
"संवत्सरं" -> सं-व-त्-स-रं
"न मांसमश्नीयान्न" -> न मां-स-म-श्नी-या-न्न
"रामामुपेयान्न" -> रा-मा-मु-पे-या-न्न
"मृन्मयेन" -> मृ-न्-म-ये-न
All perfectly clear.

Line 13:
"पिबेन्नास्य राम उच्छिष्टं पिबेत्तेज एव तत्संस्कुरुत इति ब्राह्म-"
Check every word:
"पिबेन्नास्य" -> पि-बे-न्ना-स्य
"राम" -> रा-म
"उच्छिष्टं" -> उ-च्छि-ष्टं
"पिबेत्तेज" -> पि-बे-त्ते-ज
"एव" -> ए-व
"तत्संस्कुरुत" -> त-त्-सं-स्कु-रु-त
"इति" ->