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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 282, कुल 774 में से

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पृष्ठ 282

! Wait, look at 'कु' in 'निचंकुण': 'कु' has 'ु'. Does 'च' have 'ु'?
Wait, look at 'निचंकुण': the 'च' has NO 'ु', it's 'चं'! Wait, but why 'नीचेरुरसि'?
In TS 1.4.45.1: "अवभृथ निचङ्कुण निचेरुरसि निचङ्कुणाव..."
Here it's printed: "निचंकुण नीचेरुरसि निचंकुणाव" (with long 'नी' in नीचेरुरसि? Yes, 'नीचेरुरसि').

Line 8:
देवैर्देवकृतमेनो ऽयाडव मर्त्यैर्मर्त्यकृतमुरोरा नो देव रिष-
Wait, "मर्त्यैर्मर्त्यकृतमुरोरा नो"?
In TS: "मर्त्यैर्मर्त्यकृतमुरु णो देव रिषस् पाहि".
In the image:
"म - र्त्यै - र्म - र्त्य - कृ - त - मु - रो - रा नो दे - व रि - ष -"
Look at: "मुरोरा": म + ु = मु, र + ो = रो, र + ा = रा: "मुरोरा"!
Yes, it literally says "मुरोरा नो देव रिष-"!

Line 9:
स्पाहीत्य॑थाञ्जलिनाप उपहन्ति सु